रविवार, २२ फेब्रुवारी, २०२६

मसाले वेलदोडे / बड़ी इलायची (Black Cardamom) – आयुर्वेदिक औषधीय जानकारी (हिंदी)

 🌿 मसाले वेलदोडे / बड़ी इलायची (Black Cardamom) – आयुर्वेदिक औषधीय जानकारी (हिंदी)

मसाले वेलदोडे / बड़ी इलायची (Black Cardamom) – आयुर्वेदिक औषधीय जानकारी (हिंदी)


🔶 वेलदोडे (Cardamom) – Basic Information of Medicine

🔹 सामान्य परिचय

मराठी नाम : वेलदोडे, वेलची / मोठे वेलदोडे (Black Cardamom)

हिंदी नाम : बड़ी इलायची, काली इलायची / भूरी इलायची

अंग्रेज़ी नाम : Black Cardamom / Greater Cardamom / Indian Cardamom

संस्कृत नाम : स्थूलैला, बृहदेला, भद्रैला, दिव्यगंधा, निष्कुटि आदि

वैज्ञानिक (Botanical) नाम : Amomum subulatum Roxb.

कुल (Family) : जिंजिबेरेसी कुल (Zingiberaceae)

मसाले वेलदोडे / बड़ी इलायची (Black Cardamom) – आयुर्वेदिक औषधीय जानकारी (हिंदी)


🔸 सूक्ष्म स्पष्टीकरण

इलायची मसाला मुख्यतः दो प्रकार का होता है –

1. Elettaria cardamomum (हरी / छोटी इलायची)

2. Amomum subulatum (Black Cardamom / बड़ी या काली इलायची)


🌱 वनस्पति संरचना (Plant Structure)


🌿 संरचनात्मक विवरण

पारिवारिक समूह : Zingiberaceae (अदरक कुल)

प्रकार : सदाबहार, बहुवर्षीय शाकीय वनस्पति

🌿 तना / मूल

इसका तना भूमि के नीचे स्थित होता है जिसे राइजोम (Rhizome) कहते हैं।

यह राइजोम मोटा, मांसल एवं विस्तृत होता है।

इसी राइजोम से नई पत्तियाँ और फूल विकसित होते हैं।

मसाले वेलदोडे / बड़ी इलायची (Black Cardamom) – आयुर्वेदिक औषधीय जानकारी (हिंदी)


🌿 पत्तियाँ

पत्तियाँ लंबी, हरी, linear-lanceolate (भाले जैसी आकृति वाली) होती हैं।

🌸 फूल

फूल छोटे, हल्के हरे या पीले रंग के होते हैं।

कभी-कभी इनमें सफेद या हल्की बैंगनी आभा दिखाई देती है।


🌰 फल / बीज

फल फली (Pods) के रूप में लगते हैं।

ये फल सामान्यतः तीन कोनों वाले त्रिकोणाकार होते हैं।

प्रत्येक फली में अनेक काले-भूरे बीज पाए जाते हैं।

इन्हीं बीजों का उपयोग मसाले एवं औषधि के रूप में किया जाता है।

🔍 तुलना

हरी इलायची (Elettaria) की तुलना में

काली इलायची (Amomum) की फलियाँ आकार में बड़ी, रंग में गहरी तथा

धुएँ और कपूर जैसी तीव्र सुगंध व स्वाद वाली होती हैं।


🌾 जीवन जानकारी (Life / Habitat / Growing)

🌱 प्राकृतिक निवास

पश्चिमी घाट, भारतीय हिमालय, श्रीलंका तथा अन्य उष्णकटिबंधीय क्षेत्र।

☀️ आवश्यक परिस्थितियाँ

गर्म एवं आर्द्र जलवायु

हल्की, उपजाऊ व नम मिट्टी

छायादार स्थान तथा संतुलित आर्द्रता

🌿 वृद्धि एवं उत्पादन

राइजोम से नई कोपलें निकलती हैं

फूल आने के बाद फलियाँ बनती हैं

फलियों को सुखाकर उपयोग में लाया जाता है

पारंपरिक विधि में आग/धुएँ पर सुखाकर विशेष सुगंध विकसित की जाती है

🔸 इलायची दुनिया के महंगे मसालों में से एक है।

भारत, नेपाल, भूटान आदि देशों में इसकी भारी मांग है।

मसाले वेलदोडे / बड़ी इलायची (Black Cardamom) – आयुर्वेदिक औषधीय जानकारी (हिंदी)


🍛 उपयोग (Uses)

✨ पाककला में उपयोग

सब्ज़ी, करी, पुलाव, बिरयानी, गरम मसाले में प्रयोग

कुछ क्षेत्रों में चाय या मसाला-चाय में भी उपयोग

🔥 गुण

स्वाद में कड़वा व तीखा

शरीर में ऊष्मा बढ़ाने वाला

🌿 आयुर्वेदिक औषधीय गुण (Medicinal / Traditional Uses)

• यदि पेट में गैस की समस्या हो रही हो, तो मसाले वाली बड़ी इलायची के 8–10 बीज भोजन के बाद चबाकर खाएँ और ऊपर से गुनगुना पानी पिएँ। इससे गैस व अपच की समस्या दूर होती है।

• हृदय रोग हो, साँस लेने में तकलीफ़ आती हो, तो भोजन के आधे घंटे बाद इलायची को चबाकर खाने से धीरे-धीरे समस्या में सुधार होने लगता है।

• यदि कैंसर की समस्या हो, तो इलायची के बीजों का पाउडर 1–2 चुटकी गर्म पानी में डालकर भोजन के एक घंटे बाद लगातार लेने से कैंसर कोशिकाएँ नियंत्रित होने लगती हैं।

• पुरुषों में नामर्दी बढ़ रही हो, संभोग के समय कठिनाई होती हो, तो इसके लिए 2–3 चम्मच बीजों का पाउडर गर्म पानी के साथ सुबह-शाम लेना लाभकारी होता है।

• नींद न आती हो और सिर भारी लगता हो, तो बड़ी इलायची को चंदन की तरह घिसकर सिर पर लेप लगाने से फायदा होता है।

• पेट में गर्मी बढ़ने पर तथा रक्त में उष्णता के कारण शरीर पर फोड़े-फुंसियाँ, पस आदि हो रहे हों, तो भोजन से पहले सुबह-शाम 8–10 दाने चबाकर खाएँ। फोड़े फूटकर पस बाहर निकल जाती है या सूखकर ठीक हो जाते हैं। आराम मिलता है और रक्त शुद्ध होता है।

• शरीर पर हुए फोड़ों पर नारियल के तेल में इलायची और उसके बीजों का चूर्ण पकाकर वह तेल लगाने से गंदगी निकल जाती है और रक्त शुद्ध होने में मदद मिलती है।

• मुँह के अंदर फोड़े होना, छाले पड़ना – इसके लिए बड़ी इलायची के बीजों का चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लेने से आराम मिलता है।

• दाँत में दर्द हो, तो बड़ी इलायची के बीजों की पाउडर को गर्म पानी में उबालकर उससे गरारे करने पर दाँत दर्द कम होता है और कीड़ा लगे दाँत की समस्या में मदद मिलती है।

• यदि मुँह से बदबू आती हो, तो इलायची खाना फायदेमंद होता है। दुर्गंध दूर होती है।

• हिचकी लगने पर मसाले वाली इलायची को एक कप गर्म पानी में उबालें, उसे आधा कप होने दें। फिर उसमें गुड़ मिलाकर पीने से लाभ होता है।

• गरम-ठंडा भोजन एक साथ खाने से फूड पॉयज़निंग हो जाए, तो बड़ी इलायची को कूटकर गर्म पानी में उबालें। वह पानी ठंडा करके उसमें मिश्री डालकर पीने से पाचन तंत्र ठीक होता है।

• मूत्र मार्ग में संक्रमण हो, पेशाब में जलन या परेशानी हो, तो ताँबे के बर्तन में रात को पानी भरें। उसमें इलायची के बीजों का चूर्ण डालकर रातभर रखें। सुबह उठकर वह पानी पीने से पेशाब साफ होती है, जलन कम होती है और संक्रमण दूर होने में मदद मिलती है।

• स्वप्न दोष की समस्या हो, तो इलायची के बीजों का चूर्ण एक गिलास पानी में डालकर मिश्री मिलाकर पीने से लाभ होता है।

• बुखार आने पर इलायची के बीजों की पाउडर 1–2 चुटकी मिश्री वाले पानी के साथ बार-बार पीने से बुखार कम होता है। उसके कीटाणु मूत्र व शौच मार्ग से बाहर निकलने में मदद मिलती है और ताप कम होता है।


🌰 उपयोगी भाग

फल / फली (Pod) – मसाले के रूप में

बीज (Seeds) – औषधीय व सुगंध हेतु

⚠️ सावधानी

औषधि के रूप में प्रयोग करते समय मात्रा एवं प्रकृति अनुसार आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह आवश्यक है।

पित्त दोष या पित्त की गांठ होने पर बड़ी इलायची का सेवन वर्जित है या केवल चिकित्सक की सलाह से करें।

🌿 निष्कर्ष

इस प्रकार मसाले वेलदोडे / बड़ी इलायची (Black Cardamom) की यह संपूर्ण आयुर्वेदिक औषधीय जानकारी है।




Black Cardamom (Masale Veldode / Badi Elaichi) – Ayurvedic Medicinal Information (English)

 🌿 Black Cardamom (Masale Veldode / Badi Elaichi) – Ayurvedic Medicinal Information (English)

Black Cardamom (Masale Veldode / Badi Elaichi) – Ayurvedic Medicinal Information (English)


🔶 Black Cardamom (Cardamom) – Basic Information of Medicine

🔹 General Introduction

Marathi Name : Veldode, Velchi / Mothhe Veldode (Black Cardamom)

Hindi Name : Badi Elaichi, Kali Elaichi / Bhoori Elaichi

English Name : Black Cardamom / Greater Cardamom / Indian Cardamom

Sanskrit Names : Sthūlailā, Brihadailā, Bhadrilā, Divyagandhā, Nishkuti etc.

Botanical (Scientific) Name : Amomum subulatum Roxb.

Family : Zingiberaceae (Ginger family)

🔸 Detailed Explanation

Cardamom is mainly available in two types:

1. Elettaria cardamomum – Green / Small Cardamom

2. Amomum subulatum – Black Cardamom / Large or Dark Cardamom

🌱 Plant Structure (Botanical Description)

🌿 Morphological Details

Family Group : Zingiberaceae (Ginger family)

Plant Type : Evergreen, perennial, herbaceous plant

Black Cardamom (Masale Veldode / Badi Elaichi) – Ayurvedic Medicinal Information (English)


🌿 Stem / Root

The plant has an underground stem known as a rhizome.

This rhizome is thick, fleshy, and well-developed.

New leaves and flowers grow from this rhizome.

🌿 Leaves

Leaves are long, green, linear-lanceolate (spear-shaped).

🌸 Flowers

Flowers are small, light green or yellowish in color.

Sometimes they show white or violet shades.

🌰 Fruit / Seeds

Fruits develop in the form of pods.

Pods are generally triangular in shape with three sides.

Each pod contains several dark brown to black seeds.

These seeds are used as a spice and for medicinal purposes.

Black Cardamom (Masale Veldode / Badi Elaichi) – Ayurvedic Medicinal Information (English)


🔍 Comparison

Compared to Green Cardamom (Elettaria),

Black Cardamom (Amomum) pods are larger, darker, and have a strong smoky, camphor-like aroma and taste.


🌾 Life Information (Habitat / Growth / Cultivation)

🌱 Natural Habitat

Western Ghats, Indian Himalayas, Sri Lanka, and other tropical regions.

☀️ Required Conditions

Warm and humid climate

Light, fertile, slightly moist soil

Shaded areas with balanced humidity


🌿 Growth and Production

New shoots emerge from the rhizome

Pods develop after flowering

Pods are dried before use

Traditionally, pods are dried using fire/smoke to enhance aroma

🔸 Cardamom is one of the most expensive spices in the world.

India, Nepal, Bhutan, and neighboring countries have high demand for it.

🍛 Uses

✨ Culinary Uses

Used in curries, vegetables, pulao, biryani, and spice blends

In some regions, it is also added to tea or masala tea

🔥 Properties

Bitter and pungent in taste

Increases body heat

Black Cardamom (Masale Veldode / Badi Elaichi) – Ayurvedic Medicinal Information (English)


🌿 Ayurvedic Medicinal Properties (Traditional Uses)

• If there is a problem of gas in the stomach, eat 8–10 seeds of spice cardamom after meals and drink warm water. This helps relieve gas and indigestion.

• If there is heart disease or difficulty in breathing, chewing cardamom half an hour after meals helps the condition gradually improve.

• If there is a cancer problem, taking 1–2 pinches of cardamom seed powder in warm water one hour after meals regularly helps cancer cells begin to function normally.

• If impotence is increasing in men or there is difficulty during sexual intercourse, taking 2–3 teaspoons of cardamom seed powder with warm water in the morning and evening is beneficial.

• If sleep does not come and the head feels heavy, grinding large cardamom like sandalwood and applying it as a paste on the head gives relief.lll

• If body heat increases or if excessive heat in the blood causes boils, abscesses, or pus on the body, chew 8–10 seeds before meals in the morning and evening. The boils burst and the pus drains out or they subside and heal. Relief is obtained and the blood is purified.

• Applying oil prepared by cooking cardamom and its seed powder in coconut oil on body boils helps remove impurities and supports blood purification.

• If there are boils or ulcers inside the mouth, taking powder of large cardamom seeds with warm water provides relief.

• If there is toothache, boiling large cardamom seed powder in warm water and gargling with it helps reduce tooth pain and assists in removing decay from infected teeth.

• If there is bad breath, eating cardamom is beneficial. It removes unpleasant odor.

• If hiccups occur, boil spice cardamom in one cup of hot water until it reduces to half a cup. Add jaggery and consume it for relief.

• If food poisoning occurs due to eating hot and cold foods together, crush large cardamom and boil it in hot water. Let the water cool, add rock sugar, and drink it to restore proper digestion.

• If there is a urinary tract infection, difficulty or burning during urination, fill water in a copper vessel at night and add cardamom seed powder to it. Keep it overnight. Drink this water in the morning after waking up. It helps cleanse the urinary tract, reduces burning, and aids in eliminating infection.

• If there is nocturnal emission (spermatorrhea), adding cardamom seed powder to a glass of water and drinking it with rock sugar is beneficial.

• In case of fever, taking 1–2 pinches of cardamom seed powder repeatedly with rock sugar water helps reduce fever. Germs are expelled through urine and stool, assisting in lowering the fever.

🌰 Useful Parts of the Plant

Fruit / Pod – main spice component

Seeds – used for aroma, taste, and medicinal purposes

⚠️ Precautions

When using as medicine, dosage should be decided according to body constitution and only after consulting an Ayurvedic expert.

Individuals suffering from excessive Pitta dosha or pitta-related lumps should avoid black cardamom or consume it only under medical supervision.


🌿 Conclusion

This is the complete Ayurvedic medicinal information of Black Cardamom (Masale Veldode / Badi Elaichi) presented without omitting any details.




मसाले वेलदोडे (Black Cardamom) – आयुर्वेदिक औषधी माहिती (मराठी)

 🌿 मसाले वेलदोडे (Black Cardamom) – आयुर्वेदिक औषधी माहिती (मराठी)

मसाले वेलदोडे (Black Cardamom) – आयुर्वेदिक औषधी माहिती (मराठी)


🔶 वेलदोडे (Cardamom) – Basic Information of Medicine

🔹 सामान्य परिचय

मराठी नाव : वेलदोडे, वेलची / मोठे वेलदोडे (Black Cardamom)

हिंदी नाव : बड़ी इलायची, काली इलायची / भूरी इलायची

इंग्रजी नाव : Black Cardamom / Greater Cardamom / Indian Cardamom

संस्कृत नावे :स्थूलैला, बृहदेला, भद्रैला, दिव्यगंधा, निष्कुटि इत्यादी

वैज्ञानिक (Botanical) नाव : Amomum subulatum Roxb.

कुल (Family) : जिंजिबेरेसी कुल (Zingiberaceae)

🔸 सूक्ष्म स्पष्टीकरण

इलायची हा मसाला दोन प्रकारांत मिळतो –

1. Elettaria cardamomum (हिरवी/लहान इलायची)

2. Amomum subulatum (Black Cardamom / मोठी किंवा काळी इलायची)

मसाले वेलदोडे (Black Cardamom) – आयुर्वेदिक औषधी माहिती (मराठी)


🌱 वनस्पती रचना (Plant Structure)

🌿 संरचना माहिती

पारिवारिक गट : Zingiberaceae (आले कुल)

प्रकार : सदाहरित, बहुवर्षिक शाकीय वनस्पती

🌿 खोड / मूळ

जमिनीखाली मूळखोड (Rhizome) असते. हे मूळखोड जाड, मांसल व विस्तृत असते.

याच राइझोममधून पाने व फुले उगवतात.

🌿 पाने

पाने लांबट, हिरवी, linear-lanceolate (तोफ्यासारखी) असतात.

🌸 फुले

लहान, फिकट हिरवी किंवा पिवळसर, कधी पांढऱ्या-व्हायोलिट छटेची फुले येतात.

🌰 फळ / बीज

फळे शेंगा (Pods) स्वरूपात येतात.

शेंगा साधारणतः तीन बाजूंनी त्रिकोणी असतात.

प्रत्येक शेंगेत अनेक काळी-तपकिरी बीजे असतात.

ही बीजे मसाल्याच्या व औषधी उपयोगासाठी वापरली जातात.

🔍 तुलना

Green Cardamom (Elettaria) पेक्षा

Black Cardamom (Amomum) च्या शेंगा मोठ्या, गडद रंगाच्या व धूर/कपूरयुक्त तीव्र सुगंध देणाऱ्या असतात.

🌾 जीवन माहिती (Life / Habitat / Growing)

🌱 नैसर्गिक निवास

पश्चिम घाट, भारतीय हिमालय, श्रीलंका व इतर उष्णकटिबंधीय प्रदेश.

मसाले वेलदोडे (Black Cardamom) – आयुर्वेदिक औषधी माहिती (मराठी)


☀️ आवश्यक अटी

उष्ण व आर्द्र हवामान

हलकी, सुपीक व किंचित ओलसर जमीन

सावली व योग्य आर्द्रता (Humidity)

🌿 वाढ व उत्पादन

राइझोममधून नवे तणे फुटतात

फुलांनंतर शेंगा तयार होतात

शेंगा वाळवून वापरात आणतात

पारंपरिक पद्धतीत धूर/आगीवर वाळवून खास सुगंध निर्माण केला जातो

🔸 Cardamom हा जगातील महागड्या मसाल्यांपैकी एक असून भारत, नेपाळ, भूतान इ. देशांत याची मोठी मागणी आहे.

🍛 वापर / उपयोग (Uses)

✨ पाककला

करी, भाजी, पुलाव, बिर्याणी, गरम मसाले यांत वापर

काही भागांत चहा किंवा मसाला-चहामध्ये वापर

🔥 गुणधर्म

कडू-तिखट

शरीरातील उष्णता वाढवणारे

मसाले वेलदोडे (Black Cardamom) – आयुर्वेदिक औषधी माहिती (मराठी)


🌿 आयुर्वेदिक औषधी गुणधर्म (Medicinal / Traditional Uses)

 खालील सर्व उपाय पारंपरिक लोकऔषधांवर आधारित आहेत.

• पोटात गॅस समस्या निर्माण होत असेल. तर मसाले वेलदोडे बिया आठ ते दहा जेवणानंतर खाऊन त्यावर कोमट पाणी प्यावे. गॅस अपचन समस्या दूर होते.

• हृदय रोग असेल, श्वास घेताना अडचण येणे. वेलदोडे जेवणानंतर अर्धा तासाने चावून खाणे. समस्या दूर होऊ लागते.

• कॅन्सर समस्या असेल तर बियांची पावडर एक ते दोन चिमट गरम पाण्यात टाकून जेवणानंतर एक तासाने घेत राहिल्यास कॅन्सर सेल्स सुरळीत होऊ लागतात.

• पुरुषात नामर्दी वाढत असेल. संभोग करताना अडचण येणे. यासाठी दोन ते तीन चमचे बियांची पावडर गरम पाण्यासोबत सकाळ संध्याकाळ घेणे लाभकारी आहे.

• झोप येत नसेल व डोके जड झाल्यास मोठी वेलची चंदना प्रमाणे उगाळून डोक्यावर लेप लावल्यास फायदा होतो.

• पोटात गर्मी वाढल्यास तसेच रक्तात उष्णता निर्माण होऊन शरीरावर किस्तूड, फोड, पू वगैरे निर्माण झाल्यास जेवणाच्या अगोदर सकाळ संध्याकाळ आठ ते दहा दाणे चावून खा. फोड फुटून पस बाहेर निघून जाईल. किंवा ती बसून बरे वाटेल. व आराम मिळेल. रक्त साफ होईल.

• शरीरावरील फोडावर नारळ तेलात वेलची व बियांचे चूर्ण शिजवून ते तेल लावल्यास घाण निघून जाऊन रक्त शुद्ध होण्यासाठी मदत होते.

• तोंडाच्या आत फोड येणे, तोंड येणे. यासाठी मोठ्या वेलदोड्याच्या बिया चूर्ण व कोमट पाणी घेतल्यास आराम मिळतो.

• दात दुःखी असेल तर मोठ्या वेलदोड्याच्या बियांची पावडर गरम पाण्यात काढा करून गुळण्या केल्यास दात दुःखी कमी होण्यास मदत होते. किड दातातील निघून जाते.

• तोंडाचा वास येत असेल. तर वेलची खाणे फायद्याचे असते. दुर्गंधी दूर होते.

• उचकी लागत असल्यास मसाले वेलदोडा कुठून एक कप गरम पाण्यात उकळून ते द्रावण अर्धा कप करावे. व त्यात गुळ घालून खावे फायदा होतो.

• गरम थंड जेवण एकत्रित खाल्याने फूड पॉईझन झाल्यास मोठे वेलदोडे कुटून गरम पाण्यात उकळून ते पाणी थंड करून खडीसाखर टाकून पिल्यास पचन संस्था सुरळीत होते.

• लघवी मार्गात इन्फेक्शन झाल्यास, लागवीस त्रास होत असेल. जळजळ होत असेल तर एक तांब्याच्या भांड्यात रात्री पाणी भरून घ्या. त्यामध्ये वेलची बिया चूर्ण टाकून रात्रभर ठेवा. व सकाळी ते उठल्यावर पाणी प्या. लघवीस साफ होईल, अन् जळजळ थांबून, इन्फेक्शन दूर होण्यासाठी मदत होईल.

• स्वप्न दोष होत असेल तर वेलदोडा बियांचे चूर्ण एक ग्लास पाण्यात टाकून खडीसाखर घालून प्यावे. लाभ होतो.

• ताप आल्यास बियांची पावडर एक दोन चिमट खडी साखरेच्या पाण्यासोबत पित राहिल्यास ताप कमी होऊन त्याचे जंतू लघवी व संडास मार्गे निघून जाऊन ताप कमी होण्यासाठी मदत होते.

🌰 वापरात येणारे भाग

फळ / शेंगा (Pod) – मसाल्यासाठी

बीज (Seeds) – औषधी व स्वादासाठी

⚠️ सावधान

औषध म्हणून वापरताना प्रमाण व प्रकृतीनुसार आयुर्वेदतज्ज्ञांचा सल्ला घ्यावा.

पित्तदोष, पित्ताच्या गाठी असणाऱ्यांनी मोठा वेलदोडा टाळावा किंवा डॉक्टरांच्या सल्ल्यानेच सेवन करावे.

🌿 निष्कर्ष

अशी ही मसाले वेलदोडे (Black Cardamom) विषयी सविस्तर आयुर्वेदिक औषधी माहिती.


शुक्रवार, १३ फेब्रुवारी, २०२६

विदारा (विधारा) वनस्पति – संपूर्ण आयुर्वेदिक जानकारी Vidara / Samudrapatti Vanaspati Vishay Ayurvedic Aushadhi Mahiti

 🌿 विदारा (विधारा) वनस्पति – संपूर्ण आयुर्वेदिक जानकारी

Vidara / Samudrapatti Vanaspati Vishay Ayurvedic Aushadhi Mahiti

विदारा (विधारा) वनस्पति – संपूर्ण आयुर्वेदिक जानकारी  Vidara / Samudrapatti Vanaspati Vishay Ayurvedic Aushadhi Mahiti


• परिचय

विदारा एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधीय वनस्पति है। यह बलवर्धक, शक्तिवर्धक तथा वातशामक के रूप में जानी जाती है। यह बेल के रूप में बढ़ने वाली वनस्पति है और आयुर्वेद में प्राचीन काल से इसका उपयोग किया जाता रहा हैl

• नाम

• हिंदी नाम : विदारा, समुद्रपात्ती

• मराठी नाम : विदारा / विधारा

• संस्कृत नाम : विदारा, समुद्रपात्ती, वृद्धदारु

• अंग्रेज़ी नाम : एलिफ़ेंट क्रीपर / हवाईयन बेबी वुडरोज़

• शास्त्रीय नाम : Argyreia nervosa

• कुल : Convolvulaceae

• संरचना व स्वरूप

• पत्ते

• पत्ते बड़े, मोटे और हृदयाकार होते हैं

• ऊपर की सतह गहरे हरे रंग की होती है

• नीचे की सतह सफ़ेद व रेशमी मुलायम होती है

• औषधीय दृष्टि से पत्ते अत्यंत उपयोगी होते हैं

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फूल

• फूल बड़े और आकर्षक होते हैं

• घंटी के आकार या तुरही जैसे होते हैं

• फूल गुच्छों में आते हैं

• रंग गुलाबी, बैंगनी या हल्का जामुनी होता है

• फल

• फल गोल या अंडाकार होते हैं

• प्रारंभ में हरे तथा बाद में पीले-भूरे हो जाते हैं

• फलों के भीतर बीज होते हैं

• तना व वृद्धि

• यह एक बेलनुमा वनस्पति है

• अन्य पेड़ों या सहारे पर चढ़कर बढ़ती है

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पाए जाने वाले क्षेत्र

• भारत में

• महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु

• उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल

• अन्य देश

• नेपाल, श्रीलंका, अफ़्रीका, हवाई द्वीप

• यह वनस्पति उष्ण एवं आर्द्र जलवायु में अच्छी तरह बढ़ती है

• उपयोगी भाग

• जड़ें

• पत्ते

• बीज

• तना

• आयुर्वेद में विशेष रूप से जड़ों और बीजों का अधिक उपयोग किया जाता है

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आयुर्वेदिक गुणधर्म

• रस : कटु, कषाय

• गुण : गुरु, स्निग्ध

• वीर्य : उष्ण

• विपाक : मधुर

• दोषों पर प्रभाव : वात एवं कफ शमन

पारंपरिक व आयुर्वेदिक उपयोग

• शरीर की कमजोरी दूर करने के लिए विदारा उपयोगी है

• मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत करने में सहायक है

• थकान और दुर्बलता कम करती है

• वातदोष से होने वाले दर्द में लाभदायक है

• घाव या चोट होने पर विदारा के पत्तों को पीसकर गरम करके घाव पर बाँधने से लाभ होता है

• पुराने और न भरने वाले घावों को भरने में मदद करती है

• गैंग्रीन या मधुमेह से होने वाले घावों में पत्तों का रस या घी में गरम किए हुए पत्ते उपयोगी होते हैं

• पेट में अल्सर या दस्त के बाद रक्तस्राव होने पर पत्तों का रस पानी के साथ लेने से आराम मिलता है

• मधुमेह रोगियों को चीनी नहीं डालनी चाहिए

• शरीर में सूजन होने पर पत्तों का लेप लगाने से सूजन कम होती है

• मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव होने पर पत्तों का रस पानी के साथ खाली पेट लेना लाभदायक होता है

• जड़ों का काढ़ा या चूर्ण लेने से हड्डियों का दर्द और शरीर का दर्द कम होता है

• सर्दी, बुखार, कफ और खाँसी में बीजों का चूर्ण शहद के साथ लाभ देता है

• पुरुषों में शुक्राणुओं की वृद्धि और वीर्यदोष में विदारा उपयोगी है

• कामोत्तेजक शक्ति बढ़ाने में सहायक है

• विदारा को ब्रेन टॉनिक के रूप में भी उपयोग किया जाता है

• भूलने की समस्या और मानसिक अस्थिरता में सुधार होता है

• हृदय रोगों में भी विदारा लाभकारी मानी जाती है

• वृद्ध व्यक्तियों में बलवर्धक और शक्तिवर्धक औषधि के रूप में उपयोगी है

• गठिया और जोड़ों के दर्द में पत्तों का रस या पत्तों का लेप लाभ देता है

• भूख बढ़ाने के लिए सीमित मात्रा में पत्तों का रस लेना चाहिए

• अधिक सेवन से उलटी या चक्कर आ सकते हैं

• मात्रा व सावधानी

• चूर्ण सीमित मात्रा में वैद्य की सलाह से लेना चाहिए

• गर्भवती महिलाएँ और गंभीर रोग से ग्रस्त व्यक्ति विशेषज्ञ की सलाह लें

• अधिक सेवन से बचें

• विदारा चूर्ण की मात्रा

• जड़ों या बीजों का चूर्ण आधा से एक चम्मच लें

• चूर्ण को गुनगुने पानी, दूध या शहद के साथ लिया जा सकता है

• दिन में एक बार या वैद्य की सलाह से दो बार सेवन करें

विदारा (विधारा) वनस्पति – संपूर्ण आयुर्वेदिक जानकारी  Vidara / Samudrapatti Vanaspati Vishay Ayurvedic Aushadhi Mahiti


उपयोग के अनुसार सेवन

• हड्डी दर्द, शरीर दर्द और वात रोग में चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें

• शुक्राणु वृद्धि और वीर्यदोष में चूर्ण शहद या गुनगुने दूध के साथ लें

• सर्दी, कफ और खाँसी में बीजों का चूर्ण शहद में मिलाकर लें

• विदारा पत्तों के रस की मात्रा

• पत्तों का रस एक से दो चम्मच लें

• रस को एक कप पानी में मिलाकर पिएँ

• सुबह खाली पेट लेना अधिक लाभकारी होता है

• उपयोग के अनुसार सेवन

• मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव होने पर रस पानी के साथ लें

• अल्सर या दस्त के बाद रक्तस्राव में रस पानी में मिलाकर लें

• मधुमेह रोगी रस बिना चीनी के लें

• बाहरी उपयोग की मात्रा

• घाव, सूजन या गठिया में ताज़े पत्तों को पीसकर लेप लगाएँ

• गाय के घी में पत्तों को गरम करके घाव पर लगाएँ

• बारह घंटे बाद पट्टी या लेप बदलें

• महत्वपूर्ण निर्देश

• विदारा का चूर्ण या रस अधिक मात्रा में न लें

• अधिक सेवन से उलटी, चक्कर या बेचैनी हो सकती है

• गर्भवती महिलाएँ, बच्चे और गंभीर रोगी वैद्य की सलाह अवश्य लें

• लंबे समय तक सेवन से पहले आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है

विदारा (विधारा) वनस्पति – संपूर्ण आयुर्वेदिक जानकारी  Vidara / Samudrapatti Vanaspati Vishay Ayurvedic Aushadhi Mahiti


निष्कर्ष

विदारा या विधारा एक अत्यंत उपयोगी और प्रभावशाली आयुर्वेदिक औषधीय वनस्पति है। यह शरीर को शक्ति देने, थकान कम करने, वातदोष शांत करने और अनेक रोगों में सहायक उपचार के रूप में उपयोगी है। उचित मार्गदर्शन और वैद्यकीय सलाह के साथ उपयोग करने पर विदारा स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होती है।

विदारा (विधारा) वनस्पति – संपूर्ण आयुर्वेदिक जानकारी  Vidara / Samudrapatti Vanaspati Vishay Ayurvedic Aushadhi Mahiti


विदारा (विधारा) वनस्पति – संपूर्ण आयुर्वेदिक जानकारी

Vidara / Samudrapatti Vanaspati Vishay Ayurvedic Aushadhi Mahiti

🌿 Vidara (Vidhara) Plant – Complete Ayurvedic Information

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🌿 Vidara (Vidhara) Plant – Complete Ayurvedic Information


Vidara / Samudrapatti Plant – Ayurvedic Medicinal Information

• Introduction

Vidara is a well-known Ayurvedic medicinal plant. It is recognized as a strength-enhancing, vitality-boosting, and Vata-balancing herb. This plant grows in the form of a climber and has been used in Ayurveda since ancient times.

• Names

• Marathi Name : Vidara / Vidhara

• Hindi Name : Vidara, Samudrapatti

• Sanskrit Name : Vidara, Samudrapatti, Vriddhadaru

• English Name : Elephant Creeper / Hawaiian Baby Woodrose

• Scientific Name : Argyreia nervosa

• Family : Convolvulaceae

• Structure and Appearance

• Leaves

• Leaves are large, thick, and heart-shaped

• Upper surface is dark green

• Lower surface is whitish and soft like silk

• Leaves are highly useful for medicinal purposes.

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• Flowers

• Flowers are large and attractive

• Bell-shaped or trumpet-shaped in structure

• Flowers appear in clusters

• Color is pink, purplish, or light violet

• Fruits

• Fruits are round or oval in shape

• Initially green and later turn yellowish-brown

• Fruits contain seeds

• Stem and Growth

• It is a climber-type plant

• Grows by climbing on other trees or support

• Regions of Occurrence

• Regions in India

Maharashtra, Karnataka, Tamil Nadu

• Uttarakhand, Uttar Pradesh, West Bengal

• Other Countries

• Nepal, Sri Lanka, Africa, Hawaiian Islands


• This plant grows well in warm and humid climates

• Useful Parts

• Roots • Leaves • Seeds • Stem

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In Ayurveda, roots and seeds are used more extensively

• Ayurvedic Properties

• Taste : Bitter, Astringent

• Qualities : Heavy, Unctuous

• Potency : Hot

• Post-digestive effect : Sweet

• Effect on Doshas : Pacifies Vata and Kapha

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Traditional and Ayurvedic Uses

• Vidara is useful in reducing physical weakness

• Helps strengthen muscles and bones

• Reduces fatigue and debility

• Beneficial in pain caused by Vata disorders

• In case of wounds or injuries, Vidara leaves should be crushed, warmed, and applied to the wound

• Helps heal old and non-healing wounds

• In gangrene or diabetic wounds, leaf juice or leaves warmed in cow ghee are beneficial

• In gastric ulcers or bleeding after diarrhea, leaf juice mixed with water provides relief

• Diabetic patients should avoid adding sugar

• In case of swelling, application of leaf paste helps reduce inflammation

• In excessive menstrual bleeding, leaf juice mixed with water taken on an empty stomach is beneficial

• Decoction or powder of roots helps reduce bone pain and body aches

• In cold, fever, phlegm, and cough, seed powder taken with honey is beneficial

• Vidara is useful in increasing sperm count and improving semen quality in men

• Helps enhance sexual vitality

• Vidara is also used as a brain tonic

• Helps improve memory and mental stability

• Vidara is considered beneficial in heart-related disorders

• Acts as a strength and vitality enhancer in elderly individuals

• Useful in arthritis and joint pain when leaf juice is taken or leaf paste is applied externally

• Helps improve appetite when taken in limited quantity

• Excess intake may cause vomiting or dizziness

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• Dosage and Precautions

• Powder should be taken in limited quantity under the guidance of an Ayurvedic physician

• Pregnant women and individuals with serious illnesses should consult an expert

• Excess consumption should be avoided

• Dosage of Vidara Powder

• Root or seed powder should be taken in a quantity of half to one teaspoon

• Powder can be taken with lukewarm water, milk, or honey

• Can be taken once daily or twice daily as advised by a physician

• Use According to Condition

• In bone pain, body pain, and Vata disorders, take with lukewarm water

• For sperm enhancement and semen disorders, take with honey or warm milk

• In cold, cough, and phlegm, seed powder should be taken with honey

• Dosage of Vidara Leaf Juice

• Take one to two teaspoons of fresh leaf juice

• Mix the juice in one cup of water before consumption

• Taking it in the morning on an empty stomach is more beneficial

• Use According to Condition

• In excessive menstrual bleeding, take leaf juice mixed with water

• In bleeding due to ulcers or diarrhea, take juice mixed with water

• Diabetic patients should take juice without adding sugar

• Dosage for External Application

• For wounds, swelling, or arthritis, apply paste of freshly crushed leaves

• Leaves warmed in cow ghee can be applied to wounds

• Dressing or paste should be changed after twelve hours

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Important Instructions

• Do not consume Vidara powder or juice in excessive quantity

• Excess intake may cause vomiting, dizziness, or discomfort

• Pregnant women, children, and seriously ill patients must consult an Ayurvedic physician

• Consultation with an Ayurvedic expert is necessary before long-term use

Conclusion

Vidara or Vidhara is a highly useful and effective Ayurvedic medicinal plant. It is widely used to enhance strength, reduce fatigue, balance Vata dosha, and as a supportive remedy for various diseases. When used under proper guidance and medical supervision, Vidara proves to be extremely beneficial for overall health.

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Vidara / Samudrapatti Plant – Ayurvedic Medicinal Information

विदारा (विधारा) वनस्पती – संपूर्ण आयुर्वेदिक माहिती Vidara / samudrpati vanaspati vishyi ayurvedic aushadhi mahiti

 🌿 विदारा (विधारा) वनस्पती – संपूर्ण आयुर्वेदिक माहिती

Vidara / samudrpati vanaspati vishyi ayurvedic aushadhi mahiti

 

विदारा (विधारा) वनस्पती – संपूर्ण आयुर्वेदिक माहिती  Vidara / samudrpati vanaspati vishyi ayurvedic aushadhi mahiti

• परिचय

विदारा ही एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधी वनस्पती आहे. ती बलवर्धक, शक्तिवर्धक आणि वातशामक म्हणून ओळखली जाते. ही वेलस्वरूपात वाढणारी वनस्पती असून आयुर्वेदात प्राचीन काळापासून तिचा उपयोग केला जात आहे.

• नावे

• मराठी नाव : विदारा / विधारा

• हिंदी नाव : विदारा, समुद्रपात्ती

• संस्कृत नाव : विदारा, समुद्रपात्ती, वृद्धदारु

• इंग्रजी नाव : एलिफंट क्रीपर / हवाईयन बेबी वूडरोझ

• शास्त्रीय नाव : Argyreia nervosa

• कुल : Convolvulaceae

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रचना व स्वरूप

• पाने

• पाने मोठी, जाड व हृदयाकृती असतात

• वरचा भाग गडद हिरवा असतो

• खालचा भाग पांढुरका व मऊ रेशीमासारखा असतो

• औषधी दृष्ट्या पाने अत्यंत उपयुक्त आहेत

• फुले

• फुले मोठी व आकर्षक असतात

• घंटीसारखी किंवा तुरईसारखी रचना असते

• फुले गुच्छात येतात

• रंग गुलाबी, जांभळट किंवा फिकट जांभळा असतो

• फळे

• फळे गोलसर किंवा अंडाकृती असतात

• सुरुवातीला हिरवी व नंतर पिवळसर-तपकिरी होतात

• फळांमध्ये बिया असतात

• खोड व वाढ

• ही वेलस्वरूप वनस्पती आहे

• इतर झाडांवर किंवा आधारावर चढून वाढते

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आढळणारे प्रदेश

• भारतातील प्रदेश

• महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिळनाडू • उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल

• इतर देश

• नेपाळ, श्रीलंका, आफ्रिका, हवाई बेटे

• ही वनस्पती उष्ण व दमट हवामानात चांगली वाढते

• उपयोगी भाग

• मुळे,पाने, बिया ,खोड

• आयुर्वेदात विशेषतः मुळे व बियांचा अधिक वापर केला जातो

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• आयुर्वेदिक गुणधर्म

• रस : कटु, कषाय • गुण : गुरु, स्निग्ध • वीर्य : उष्ण • विपाक : मधुर

• दोषांवर परिणाम : वात व कफ शमन

पारंपरिक व आयुर्वेदिक उपयोग

• शरीरातील दुर्बलता कमी करण्यासाठी विदारा उपयुक्त आहे

• स्नायू व हाडे मजबूत करण्यासाठी वापरली जाते

• थकवा व अशक्तपणा दूर करण्यास मदत करते

• वातदोषामुळे होणाऱ्या वेदनांवर लाभदायक आहे

• जखम किंवा घाव असल्यास विदाराची पाने चेचून गरम करून जखमेवर लावून बांधावीत

• जुन्या व न भरलेल्या जखमा भरून येण्यास मदत होते

• गँगरीन, मधुमेहामुळे होणाऱ्या जखमांमध्ये विदाराच्या पानांचा रस किंवा तुपात गरम केलेली पाने उपयुक्त ठरतात

• पोटातील अल्सर किंवा अतिसारानंतर रक्तस्राव होत असल्यास पानांचा रस पाण्यातून घेतल्यास आराम मिळतो

• मधुमेह असलेल्या रुग्णांनी साखर टाळावी

• शरीरावर सूज असल्यास पानांचा लेप लावल्याने सूज कमी होते

• मासिक पाळीत जास्त रक्तस्राव होत असल्यास पानांचा रस पाण्यातून उपाशीपोटी घेणे लाभदायक ठरते

• मुळांचे चूर्ण उकळून घेतल्यास हाडांचे दुखणे व अंगदुखी कमी होते

• सर्दी, ताप, कफ व खोकल्यावर बियांचे चूर्ण मधासोबत घेणे उपयुक्त आहे

• पुरुषांमध्ये शुक्राणू वाढीसाठी व वीर्यदोषावर विदारा उपयुक्त आहे

• कामोत्तेजक शक्ती वाढवण्यास मदत करते

• विदारा ब्रेन टॉनिक म्हणून वापरली जाते

• विस्मरण, मानसिक अस्थिरता यामध्ये सुधारणा दिसून येते

• हृदयविकारामध्येही विदारा लाभदायक मानली जाते

• वृद्ध व्यक्तींमध्ये शक्तिवर्धक व बलवर्धक औषध म्हणून वापरली जाते

• संधिवात व सांधेदुखीमध्ये पानांचा रस किंवा पानांचा लेप उपयोगी ठरतो

• भूक वाढवण्यासाठी मर्यादित प्रमाणात पानांचा रस घ्यावा

• अति सेवन केल्यास उलटी किंवा चक्कर येऊ शकते

• मात्रा व काळजी

• चूर्ण मर्यादित प्रमाणात वैद्यांच्या सल्ल्याने घ्यावे

• गर्भवती महिला व गंभीर आजार असलेल्या व्यक्तींनी तज्ञांचा सल्ला घ्यावा

• अति सेवन टाळावे

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विदारा चूर्णाचे प्रमाण

• विदाराच्या मुळांचे किंवा बियांचे चूर्ण अर्धा ते एक चमचा घ्यावे

• चूर्ण कोमट पाणी, दूध किंवा मधासोबत घेता येते

• दिवसातून एकदा किंवा वैद्यांच्या सल्ल्याने दोनदा सेवन करावे

• उपयोगानुसार सेवन

हाडदुखी, अंगदुखी व वातविकारात चूर्ण कोमट पाण्यासोबत घ्यावे

• शुक्राणू वाढीसाठी व वीर्यदोषात चूर्ण मध किंवा कोमट दूधासोबत घ्यावे

• सर्दी, कफ, खोकला यासाठी बियांचे चूर्ण मधात मिसळून घ्यावे

• विदारा पानांच्या रसाचे प्रमाण

• विदाराच्या पानांचा रस एक ते दोन चमचे घ्यावा

• रस एक कप पाण्यात मिसळून सेवन करावा

• सकाळी उपाशीपोटी घेणे अधिक लाभदायक ठरते.

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उपयोगानुसार सेवन

• मासिक पाळीत जास्त रक्तस्राव होत असल्यास पानांचा रस पाण्यातून घ्यावा

• अल्सर किंवा अतिसारानंतर रक्तस्राव होत असल्यास रस पाण्यात मिसळून घ्यावा

• मधुमेह असलेल्या व्यक्तींनी रस साखर न घालता घ्यावा

• बाह्य वापरासाठी प्रमाण

• जखम, सूज किंवा संधिवातामध्ये विदाराची ताजी पाने चेचून लेप करावा

• गाईच्या तुपात पाने गरम करून जखमेवर लावावीत

• बारा तासांनी पट्टी किंवा लेप बदलावा

• महत्त्वाच्या सूचना

• विदारा चूर्ण किंवा रस अति प्रमाणात घेऊ नये

• जास्त सेवन केल्यास उलटी, चक्कर किंवा अस्वस्थता जाणवू शकते

• गर्भवती महिला, लहान मुले व गंभीर आजार असलेल्या व्यक्तींनी वैद्यांचा सल्ला घ्यावा

• दीर्घकाळ सेवन करण्यापूर्वी आयुर्वेदतज्ञांचा सल्ला आवश्यक आहे

निष्कर्ष

विदारा किंवा विधारा ही एक अत्यंत उपयुक्त आणि प्रभावी आयुर्वेदिक औषधी वनस्पती आहे. शरीराला बळ देणे, थकवा कमी करणे, वातदोष शमवणे आणि अनेक आजारांवर सहाय्यक उपचार म्हणून तिचा मोठ्या प्रमाणावर उपयोग केला जातो. योग्य मार्गदर्शन व वैद्यकीय सल्ल्याने वापर केल्यास विदारा आरोग्यासाठी अत्यंत लाभदायक ठरते.

विदारा (विधारा) वनस्पती – संपूर्ण आयुर्वेदिक माहिती

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मसाले वेलदोडे / बड़ी इलायची (Black Cardamom) – आयुर्वेदिक औषधीय जानकारी (हिंदी)

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