चिरायता (चिरायत) वनस्पति : आयुर्वेदिक औषधीय गुण, उपयोग एवं संपूर्ण जानकारी
Chirata (Swertia chirata): Ayurvedic Medicinal Properties, Uses & Complete Information
🌱 वनस्पति के नाम
• मराठी नाम : चिरायत, कडू चिरायत
• हिंदी नाम : चिरायता, कड़वा चिरायता
• अंग्रेज़ी नाम : चिराटा, इंडियन जेंशियन
• संस्कृत नाम : किराततिक्त, भूनिंब
• शास्त्रीय नाम : स्वेर्टिया चिराटा
• कुल : जेंशियानेसी
चिरायता वनस्पति का परिचय
• चिरायता अत्यंत कड़वे स्वाद वाली एक औषधीय वनस्पति है, जिसे आयुर्वेद में बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।
• यह वनस्पति मुख्यतः ज्वर, पाचन विकार, रक्त दोष तथा यकृत विकारों में उपयोग की जाती है।
• चिरायता का उल्लेख प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है।
वनस्पति का प्रकार
• औषधीय पौधा
• एकवर्षीय वनस्पति
ऊँचाई
• लगभग तीस से नब्बे सेंटीमीटर तक
पत्तियाँ
• पत्तियाँ आमने-सामने उगने वाली, लंबी, नुकीली एवं हरे रंग की होती हैं।
• स्वाद में अत्यंत कड़वी तथा औषधीय दृष्टि से अत्यंत उपयोगी होती हैं।
फूल
• छोटे, हरे-पीले रंग के फूल गुच्छों में लगते हैं।
• इनमें औषधीय गुण पाए जाते हैं।
तना
• सीधा, कोमल तथा हरे से हल्के भूरे रंग का होता है।
बीज
• छोटे एवं भूरे रंग के होते हैं।
• इन्हीं से नए पौधे तैयार होते हैं।
🌍 आवास क्षेत्र
• भारत के हिमालयी क्षेत्र
• उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश
• नेपाल एवं भूटान
• समुद्र तल से बारह सौ से तीन हजार मीटर की ऊँचाई पर
⚕️ आयुर्वेदिक गुण
• रस : तिक्त
• गुण : लघु, रूक्ष
• वीर्य : शीत
• विपाक : कटु
• दोष प्रभाव : पित्त एवं कफ शमन
चिरायता के औषधीय उपयोग
• पेट एवं आँतों के विकार
– आँतों में कीड़े, बच्चों में जंत या दस्त होने पर चिरायता पाउडर पानी में उबालकर ठंडा होने पर शहद मिलाकर सेवन करना लाभकारी होता है।
– पेट दर्द या दस्त में चिरायता पाउडर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट लेने से लाभ होता है।
• त्वचा रोग
– रक्त की अशुद्धि से होने वाले त्वचा रोग, खुजली एवं दाग-धब्बों में चिरायता की पत्तियाँ पीसकर लगाने से लाभ होता है।
– चिरायता का काढ़ा पीने से भी त्वचा रोगों में सुधार होता है।
– चेहरे पर छोटे दाने होने पर चिरायता पाउडर या पेस्ट लगाने से फायदा होता है।
• सोरायसिस
– चिरायता, गिलोय एवं कुटकी की छाल का चूर्ण मिलाकर काढ़ा बनाकर नियमित सेवन करने से रोग में कमी आती है।
• आँखों की दृष्टि
– दृष्टि कमजोर होने पर चिरायता की पत्तियाँ पीसकर आँखों पर लेप लगाने से लाभ होता है।
– सूखी पेस्ट को गीला कर लगाने से भी दृष्टि सुधारने में सहायता मिलती है।
• यकृत विकार
– यकृत में विषाक्तता बढ़ने पर चिरायता पत्तियों का रस या पाउडर सेवन करने से यकृत शुद्ध होता है और कार्यक्षमता बढ़ती है।
• कर्क रोग एवं गांठें
– शरीर में कैंसर की गांठ या अन्य गांठों में चिरायता का नियमित काढ़ा उपयोगी माना जाता है।
– नेपाली चिरायता को कर्क रोग में प्रभावी माना जाता है।
• रोग प्रतिरोधक क्षमता
– चिरायता का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है।
• ज्वर एवं संक्रामक रोग
– बुखार, शरीर दर्द, हाथ-पैर दर्द, नाक-मुँह में गर्मी, शरीर की गर्मी बढ़ना, किडनी संक्रमण, थकान, कफ विकार एवं मलेरिया में चिरायता का काढ़ा उपयोगी होता है।
– चिरायता मदर टिंचर को गुनगुने पानी में मिलाकर भोजन के पहले या बाद सेवन किया जाता है।
– नियमित सेवन से पुराने ज्वर, मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड एवं विषम ज्वर में कमी आती है।
– माना जाता है कि इस औषधि की खोज होम्योपैथी विशेषज्ञ कालीकुमार भट्टाचार्य ने की थी।
• ताप उत्पन्न करने वाले जीवाणु
– चिरायता ताप पैदा करने वाले जीवाणुओं को नष्ट करने का कार्य करता है।
– शहद के साथ चिरायता पाउडर लेने से बुखार कम होता है।
• अम्लता एवं उलटी
– अम्लता, उलटी एवं खट्टी डकार में चिरायता का काढ़ा पीने से पित्त शांत होता है।
• गलगंड एवं शरीर की गांठें
– गलगंड या शरीर पर गांठ होने पर चिरायता का काढ़ा या पाउडर लाभकारी होता है।
• मधुमेह
– मधुमेह में रक्त शर्करा नियंत्रित रखने एवं इंसुलिन निर्माण की क्षमता बढ़ाने में चिरायता सहायक होती है।
• रक्ताल्पता
– शरीर में रक्त की कमी एवं पीलापन दूर करने के लिए चिरायता का काढ़ा उपयोगी माना जाता है।
मानसिक तनाव
• चिरायता मानसिक तनाव को कम करने में सहायक होती है।
स्त्री रोग
• मासिक धर्म के समय अधिक रक्तस्राव होने पर या गर्भाशय में सूजन होने पर चिरायता का काढ़ा लेना लाभकारी होता है।
रक्तपित्त
• नाक से खून आना या मल के साथ रक्त जाने की समस्या में चिरायता पाउडर या रस को पानी में उबालकर काढ़ा बनाना चाहिए।
• काढ़ा ठंडा होने पर उसमें शहद या मिश्री मिलाकर पीने से रक्तस्राव कम होता है।
आँतों के घाव और अल्सर
• बड़ी आँत में घाव या पेट में अल्सर होने पर चिरायता और मुलेठी का एक साथ सेवन करने से हानिकारक कीटाणु नष्ट होते हैं और घाव भरने में सहायता मिलती है।
वात दोष और जोड़ों का दर्द
• वात दोष और जोड़ों के दर्द में चिरायता का काढ़ा लाभदायक माना जाता है।
त्रिफला मिश्रण
• चिरायता, हरड़, बहेड़ा और आँवला को समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनाकर नियमित सेवन करने से स्वास्थ्य को विशेष लाभ होता है।
चिरायता सेवन की विधियाँ
चिरायता का काढ़ा बनाने की विधि
• बुखार, पेट के रोग, मधुमेह, त्वचा रोग, यकृत विकार और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए उपयोगी।
• पानी में चिरायता पाउडर या पत्तियाँ डालकर उबालें और आधा रहने दें।
• छानकर गुनगुना या ठंडा होने पर सेवन करें।
• सुबह खाली पेट या भोजन के कुछ समय बाद लेना उपयुक्त होता है।
चिरायता पाउडर का सेवन
• बुखार, पेट दर्द, रक्त शुद्धि, अम्लता और वात दोष में लाभकारी।
• पाउडर को शहद के साथ चाटें या गुनगुने पानी के साथ लें।
• दिन में एक बार सेवन पर्याप्त होता है।
भिगोया हुआ चिरायता पानी
• दस्त, पेट दर्द और आँतों के विकारों में उपयोगी।
• चिरायता पाउडर को पानी में भिगोकर रातभर रखें।
• सुबह खाली पेट छानकर पिएँ।
चिरायता रस का सेवन
• यकृत में विषाक्तता, रक्त शुद्धि और त्वचा रोगों में सहायक।
• ताजी पत्तियाँ पीसकर रस निकालें और हल्का उबालें।
• ठंडा होने पर शहद मिलाकर पीना लाभकारी होता है।
चिरायता मदर टिंचर का सेवन
• पुराने बुखार, मलेरिया, डेंगू और टाइफॉइड में उपयोगी।
• गुनगुने पानी में मिलाकर सेवन किया जाता है।
त्वचा रोगों में बाहरी उपयोग
• खुजली, दाने, चकत्ते और सोरायसिस में लाभदायक।
• ताजी पत्तियाँ पीसकर प्रभावित त्वचा पर लगाएँ।
• दिन में एक से दो बार लगाया जा सकता है।
आँखों के लिए उपयोग
• पत्तियाँ पीसकर हल्का लेप बनाएँ।
• आँखें बंद रखकर बाहर से हल्के हाथ से लगाएँ।
• आँखों के अंदर सीधे प्रयोग न करें।
मिश्र चूर्ण के रूप में सेवन
• चिरायता, हरड़, बहेड़ा और आँवला को समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनाएँ।
• रोज गुनगुने पानी के साथ सेवन करें।
⚠️ महत्वपूर्ण सूचना
• चिरायता अत्यंत कड़वी और प्रभावशाली औषधि है, इसलिए अधिक मात्रा में सेवन न करें।
• गर्भवती महिलाएँ और अत्यधिक कमजोर व्यक्ति चिकित्सक की सलाह से ही सेवन करें।
• लंबे समय तक लगातार सेवन से बचें।
• जिन लोगों में शर्करा का स्तर कम रहता है, उन्हें चिरायता का सेवन नहीं करना चाहिए या वैद्य की सलाह लेनी चाहिए।
चिरायता (चिरायत) वनस्पति : आयुर्वेदिक औषधीय गुण, उपयोग एवं संपूर्ण जानकारी
Chirata (Swertia chirata): Ayurvedic Medicinal Properties, Uses & Complete Information




























