🌿 शालपर्णी वनस्पति जानकारी | Shalparni Plant Information in Hindi
🔹 शालपर्णी के नाम (Names of Shalparni)
🌱 मराठी नाम : शालपर्णी, साळवण, साळवणपर्णी
🌱 हिंदी नाम : शालपर्णी, सालपर्णी, सालवन
🌱 अंग्रेज़ी नाम : Shalparni Plant
🌱 संस्कृत नाम : शालपर्णी, गुहा, अंशुमती
🌱 वैज्ञानिक नाम : Desmodium gangeticum
🌱 वनस्पति कुल (Family) : Fabaceae (दलहनी कुल)
🌿 शालपर्णी वनस्पति का वर्णन
शालपर्णी एक बहुवर्षीय, औषधीय झाड़ी वर्ग की वनस्पति है। आयुर्वेद में इस वनस्पति को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। शालपर्णी प्रसिद्ध आयुर्वेदिक समूह दशमूल की एक प्रमुख औषधीय वनस्पति है।
📏 शालपर्णी वनस्पति का आकार
यह वनस्पति सामान्यतः 2 से 4 फीट तक ऊँची होती है।
इसका तना हल्का लकड़ीदार होता है तथा उस पर छोटे-छोटे रोएँ होते हैं।
इसकी शाखाएँ फैली हुई होती हैं।
🍃 शालपर्णी की पत्तियाँ
पत्तियाँ एकपर्णीय (Single leaflet) होती हैं।
पत्तियों का आकार अंडाकार से लंबा होता है।
ऊपर से गहरा हरा और नीचे से हल्का हरा रंग होता है।
पत्तियाँ थोड़ी मोटी और मुलायम होती हैं।
🌸 शालपर्णी के फूल
फूल आकार में छोटे होते हैं।
फूलों का रंग सफेद, हल्का गुलाबी या बैंगनी होता है।
ये फूल मुख्यतः वर्षा ऋतु (जून से अगस्त) में आते हैं।
🌰 शालपर्णी के फल
फल फली (Pods) के रूप में होते हैं।
प्रत्येक फली लगभग 5 से 8 छोटे भागों में विभाजित होती है।
फलों में छोटे बीज पाए जाते हैं।
🌿 शालपर्णी के उपयोगी भाग :
जड़ें, पत्तियाँ, तना, संपूर्ण वनस्पति
आयुर्वेद में मुख्य रूप से जड़ों का औषधीय उपयोग किया जाता है।
📜 शालपर्णी की आयुर्वेदिक जानकारी
🔹 आयुर्वेदिक वर्गीकरण
शालपर्णी दशमूल एवं लघुपंचमूल समूह की वनस्पति है।
🔹 रस – गुण – वीर्य – विपाक
रस : मधुर (मीठा), तिक्त (कड़वा)
गुण : गुरु (भारी), स्निग्ध
वीर्य : उष्ण
विपाक : मधुर
🔹 दोषों पर प्रभाव
वात दोष को शांत करती है
कफ दोष को कम करती हैl
पित्त को संतुलित रखती हैl
🩺 शालपर्णी के आयुर्वेदिक लाभ
1️⃣ वातजन्य रोगों में उपयोगी
शालपर्णी वात दोष को कम करती है।
संधिवात, कटिवात, मांसपेशियों का दर्द, शरीर दर्द में विशेष लाभकारी है।
2️⃣ जोड़ों के दर्द और सूजन में लाभकारी
शालपर्णी में शोथहर (Anti-inflammatory) गुण होते हैं, जिससे जोड़ों की सूजन, दर्द और जकड़न कम होती है।
3️⃣ दमा, खाँसी और श्वसन रोगों में लाभकारी
यह वनस्पति कफ को पतला करके श्वसन मार्ग को साफ करती है।
दमा के दौरे, सूखी खाँसी और साँस फूलने में उपयोगी है।
4️⃣ बुखार और शरीर दर्द में लाभकारी
शालपर्णी ज्वरनाशक है।
विषम ज्वर एवं शरीर दर्द के साथ आने वाले बुखार में इसकी जड़ का काढ़ा लाभकारी माना जाता है।
5️⃣ पाचन शक्ति को बढ़ाती है
यह औषधि अग्निदीपक और पाचक है।
भूख न लगना, अपच और पेट फूलने में सहायक है।
6️⃣ शरीर को बल प्रदान करती है (Balya)
शालपर्णी में बल्य एवं रसायन गुण होते हैं, जिससे शरीर की ताकत बढ़ती है और थकान कम होती है।
7️⃣ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है
नियमित एवं उचित मात्रा में सेवन करने से इम्युनिटी बढ़ती है और शरीर रोगों से लड़ने में सक्षम बनता है।
💊 शालपर्णी का औषधीय उपयोग
🔹 1) शालपर्णी जड़ का काढ़ा (क्वाथ)
विधि. : शालपर्णी जड़ का चूर्ण – 1 चम्मच
2 कप पानी में उबालकर 1 कप शेष रहने दें
सेवन. : सुबह-शाम
उपयोग. : वातदर्द, बुखार, दमा, शरीर दर्द
🔹 2) शालपर्णी चूर्ण
मात्रा. : 3 से 5 ग्राम
सेवन विधि: गुनगुने पानी या शहद के साथ
उपयोग:
पाचन सुधार, कमजोरी, जोड़ों का दर्द.
🔹 3) आयुर्वेदिक औषधियों में उपयोग
शालपर्णी निम्नलिखित प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधियों में उपयोग की जाती है:
दशमूलारिष्ट, च्यवनप्राश, दशमूल क्वाथ, बलारिष्ट
ये औषधियाँ वातशामक, बलवर्धक और रसायन के रूप में कार्य करती हैं।
⚠️ सावधानियाँ एवं निर्देश :
गर्भवती महिलाएँ और छोटे बच्चे चिकित्सकीय सलाह के बिना सेवन न करें
अधिक मात्रा में उपयोग से बचें
📝 निष्कर्ष
शालपर्णी एक अत्यंत उपयोगी और बहुगुणी आयुर्वेदिक औषधीय वनस्पति है। इसका सही और संतुलित उपयोग करने से अनेक रोगों में लाभ प्राप्त होता है। आयुर्वेद में हजारों वर्षों से उपयोग में लाई जा रही यह वनस्पति आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
एसी है
शालपर्णी वनस्पति जानकारी | Shalparni Plant Information in Hindi



























