कुष्मांड / कोहड़ा / पेठा फल का आयुर्वेदिक महत्व
नाम :
• मराठी नाम : कुष्मांड / कोहळा / पांढरा भोपळा / पेठा
• हिंदी नाम : पेठा, कद्दू (सफेद कद्दू), कुष्मांड
• अंग्रेज़ी नाम : Ash Gourd, Winter Melon, White Pumpkin
• संस्कृत नाम : कुष्मांड (Kushmanda)
• वैज्ञानिक नाम : Benincasa hispida
परिचय :
कुष्मांड अर्थात कोहड़ा एक बेल वर्गीय (लता) वनस्पति है। यह भारत में सर्वत्र पाई जाती है और इसकी खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। आयुर्वेद में इस वनस्पति का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है तथा इसका औषधीय उपयोग किया जाता है। यह आहार में भी व्यापक रूप से उपयोग की जाती है।
वनस्पति संरचना (Plant Structure) :
• मूल (Roots) :
कुष्मांड के पौधे की जड़ें रेशेदार होती हैं। ये मिट्टी में गहराई तक फैलती हैं और पौधे को सहारा देती हैं।
• तना (Stem) :
तना लंबा और मुलायम होता है। यह बेल की तरह फैलता है और उस पर सूक्ष्म रोएं (बाल) होते हैं। तना सहारा लेकर बढ़ता है।
• पत्ते (Leaves) :
पत्ते बड़े, चौड़े और गोलाकार होते हैं। इनमें हल्का रोएंदारपन होता है। ये हरे रंग के होते हैं और इनमें स्पष्ट शिराएं दिखाई देती हैं।
• फूल (Flowers) :
फूल पीले रंग के होते हैं। नर और मादा फूल अलग-अलग होते हैं। ये मधुमक्खियों को आकर्षित करते हैं, जिससे परागण होकर फल बनता है।
• फल (Fruit) :
फल बड़ा, गोल या लंबाकार होता है। ऊपर से सफेद रंग का होता है।
कच्चा होने पर हरा और पकने पर सफेद दिखाई देता है। अंदर सफेद गूदा होता है, जिससे “पेठा” नामक मिठाई बनाई जाती है।
• बीज (Seeds) :
फल के अंदर सफेद रंग के बीज होते हैं।
गुणधर्म :
यह फल शीतल प्रकृति का होता है। यह पाचन में हल्का, पौष्टिक, ताजगी देने वाला तथा शरीर की गर्मी कम करने वाला होता है।
कुष्मांड / कोहड़ा / पेठा के आयुर्वेदिक महत्व व उपयोग :
• यह शरीर के वात और पित्त दोष को कम करता है।
• मस्तिष्क की स्मरण शक्ति (Memory) बढ़ाता है तथा बुद्धि को तेज करता है।
• भूलने की समस्या, मानसिक तनाव, झटके (Fits), मिर्गी जैसी समस्याओं में लाभकारी है।
• मानसिक तनाव कम कर अच्छी नींद लाने में सहायक है।
• अधिक प्यास लगना और गले में सूखापन जैसी समस्याओं को दूर करता है।
• अनुलोमक होने के कारण कब्ज, गैस आदि समस्याओं को दूर करता है और पाचन क्रिया सुधारता है।
• यह पित्त शामक है, इसलिए शरीर की गर्मी कम करता है।
• पेट के कीड़े नष्ट कर मल के माध्यम से बाहर निकालने में मदद करता है।
• हृदय को मजबूत बनाने में सहायक है।
• फेफड़ों को बल प्रदान करता है।
• रक्तपित्त (नाक से खून आना) में लाभकारी है।
• मूत्र संबंधी समस्या, जैसे पेशाब में रुकावट या पथरी होने पर लाभदायक है।
• शुक्र धातु को बढ़ाने में सहायक है।
• शरीर की गर्मी कम कर पित्त को संतुलित रखता है तथा भूख बढ़ाता है।
• बीजों का चूर्ण (3 से 5 ग्राम) पेट के कीड़े निकालने में उपयोगी है।
• मन को शांत करता है और कामोत्तेजना बढ़ाता है।
• इसमें कैलोरी कम होती है, इसलिए वजन नियंत्रण में सहायक है।
उपयोग कैसे करें :
• रोज सुबह इसका रस (जूस) निकालकर 10 से 30 मि.ली. सेवन करना लाभकारी है।
• इससे “पेठा” नामक मिठाई बनाई जाती है।
• सब्जी या सूप के रूप में सेवन किया जाता है।
• आयुर्वेदिक औषधियों में इसका व्यापक उपयोग होता है।
खेती (Cultivation) :
यह पौधा जल निकास वाली भूमि तथा गर्म और आर्द्र (नम) जलवायु में अच्छी तरह बढ़ता है। विशेष रूप से वर्षा ऋतु में इसकी खेती की जाती है।
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टिप :
कुष्मांड अर्थात कोहड़ा स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी और पौष्टिक आहार है। आयुर्वेद में इसका विशेष महत्व है। इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं होते, लेकिन इसका सेवन उचित मात्रा में करना चाहिए।
कुष्मांड / कोहड़ा / पेठा फल का आयुर्वेदिक महत्व
Kushmand / Kohda / Petha – Ayurvedic Information in Hindi








































