🌿 विदारा (विधारा) वनस्पति – संपूर्ण आयुर्वेदिक जानकारी
Vidara / Samudrapatti Vanaspati Vishay Ayurvedic Aushadhi Mahiti
• परिचय
विदारा एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधीय वनस्पति है। यह बलवर्धक, शक्तिवर्धक तथा वातशामक के रूप में जानी जाती है। यह बेल के रूप में बढ़ने वाली वनस्पति है और आयुर्वेद में प्राचीन काल से इसका उपयोग किया जाता रहा हैl
• नाम
• हिंदी नाम : विदारा, समुद्रपात्ती
• मराठी नाम : विदारा / विधारा
• संस्कृत नाम : विदारा, समुद्रपात्ती, वृद्धदारु
• अंग्रेज़ी नाम : एलिफ़ेंट क्रीपर / हवाईयन बेबी वुडरोज़
• शास्त्रीय नाम : Argyreia nervosa
• कुल : Convolvulaceae
• संरचना व स्वरूप
• पत्ते
• पत्ते बड़े, मोटे और हृदयाकार होते हैं
• ऊपर की सतह गहरे हरे रंग की होती है
• नीचे की सतह सफ़ेद व रेशमी मुलायम होती है
• औषधीय दृष्टि से पत्ते अत्यंत उपयोगी होते हैं
• फूल
• फूल बड़े और आकर्षक होते हैं
• घंटी के आकार या तुरही जैसे होते हैं
• फूल गुच्छों में आते हैं
• रंग गुलाबी, बैंगनी या हल्का जामुनी होता है
• फल
• फल गोल या अंडाकार होते हैं
• प्रारंभ में हरे तथा बाद में पीले-भूरे हो जाते हैं
• फलों के भीतर बीज होते हैं
• तना व वृद्धि
• यह एक बेलनुमा वनस्पति है
• अन्य पेड़ों या सहारे पर चढ़कर बढ़ती है
• पाए जाने वाले क्षेत्र
• भारत में
• महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु
• उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल
• अन्य देश
• नेपाल, श्रीलंका, अफ़्रीका, हवाई द्वीप
• यह वनस्पति उष्ण एवं आर्द्र जलवायु में अच्छी तरह बढ़ती है
• उपयोगी भाग
• जड़ें
• पत्ते
• बीज
• तना
• आयुर्वेद में विशेष रूप से जड़ों और बीजों का अधिक उपयोग किया जाता है
• आयुर्वेदिक गुणधर्म
• रस : कटु, कषाय
• गुण : गुरु, स्निग्ध
• वीर्य : उष्ण
• विपाक : मधुर
• दोषों पर प्रभाव : वात एवं कफ शमन
• पारंपरिक व आयुर्वेदिक उपयोग
• शरीर की कमजोरी दूर करने के लिए विदारा उपयोगी है
• मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत करने में सहायक है
• थकान और दुर्बलता कम करती है
• वातदोष से होने वाले दर्द में लाभदायक है
• घाव या चोट होने पर विदारा के पत्तों को पीसकर गरम करके घाव पर बाँधने से लाभ होता है
• पुराने और न भरने वाले घावों को भरने में मदद करती है
• गैंग्रीन या मधुमेह से होने वाले घावों में पत्तों का रस या घी में गरम किए हुए पत्ते उपयोगी होते हैं
• पेट में अल्सर या दस्त के बाद रक्तस्राव होने पर पत्तों का रस पानी के साथ लेने से आराम मिलता है
• मधुमेह रोगियों को चीनी नहीं डालनी चाहिए
• शरीर में सूजन होने पर पत्तों का लेप लगाने से सूजन कम होती है
• मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव होने पर पत्तों का रस पानी के साथ खाली पेट लेना लाभदायक होता है
• जड़ों का काढ़ा या चूर्ण लेने से हड्डियों का दर्द और शरीर का दर्द कम होता है
• सर्दी, बुखार, कफ और खाँसी में बीजों का चूर्ण शहद के साथ लाभ देता है
• पुरुषों में शुक्राणुओं की वृद्धि और वीर्यदोष में विदारा उपयोगी है
• कामोत्तेजक शक्ति बढ़ाने में सहायक है
• विदारा को ब्रेन टॉनिक के रूप में भी उपयोग किया जाता है
• भूलने की समस्या और मानसिक अस्थिरता में सुधार होता है
• हृदय रोगों में भी विदारा लाभकारी मानी जाती है
• वृद्ध व्यक्तियों में बलवर्धक और शक्तिवर्धक औषधि के रूप में उपयोगी है
• गठिया और जोड़ों के दर्द में पत्तों का रस या पत्तों का लेप लाभ देता है
• भूख बढ़ाने के लिए सीमित मात्रा में पत्तों का रस लेना चाहिए
• अधिक सेवन से उलटी या चक्कर आ सकते हैं
• मात्रा व सावधानी
• चूर्ण सीमित मात्रा में वैद्य की सलाह से लेना चाहिए
• गर्भवती महिलाएँ और गंभीर रोग से ग्रस्त व्यक्ति विशेषज्ञ की सलाह लें
• अधिक सेवन से बचें
• विदारा चूर्ण की मात्रा
• जड़ों या बीजों का चूर्ण आधा से एक चम्मच लें
• चूर्ण को गुनगुने पानी, दूध या शहद के साथ लिया जा सकता है
• दिन में एक बार या वैद्य की सलाह से दो बार सेवन करें
• उपयोग के अनुसार सेवन
• हड्डी दर्द, शरीर दर्द और वात रोग में चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें
• शुक्राणु वृद्धि और वीर्यदोष में चूर्ण शहद या गुनगुने दूध के साथ लें
• सर्दी, कफ और खाँसी में बीजों का चूर्ण शहद में मिलाकर लें
• विदारा पत्तों के रस की मात्रा
• पत्तों का रस एक से दो चम्मच लें
• रस को एक कप पानी में मिलाकर पिएँ
• सुबह खाली पेट लेना अधिक लाभकारी होता है
• उपयोग के अनुसार सेवन
• मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव होने पर रस पानी के साथ लें
• अल्सर या दस्त के बाद रक्तस्राव में रस पानी में मिलाकर लें
• मधुमेह रोगी रस बिना चीनी के लें
• बाहरी उपयोग की मात्रा
• घाव, सूजन या गठिया में ताज़े पत्तों को पीसकर लेप लगाएँ
• गाय के घी में पत्तों को गरम करके घाव पर लगाएँ
• बारह घंटे बाद पट्टी या लेप बदलें
• महत्वपूर्ण निर्देश
• विदारा का चूर्ण या रस अधिक मात्रा में न लें
• अधिक सेवन से उलटी, चक्कर या बेचैनी हो सकती है
• गर्भवती महिलाएँ, बच्चे और गंभीर रोगी वैद्य की सलाह अवश्य लें
• लंबे समय तक सेवन से पहले आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है
• निष्कर्ष
विदारा या विधारा एक अत्यंत उपयोगी और प्रभावशाली आयुर्वेदिक औषधीय वनस्पति है। यह शरीर को शक्ति देने, थकान कम करने, वातदोष शांत करने और अनेक रोगों में सहायक उपचार के रूप में उपयोगी है। उचित मार्गदर्शन और वैद्यकीय सलाह के साथ उपयोग करने पर विदारा स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होती है।
विदारा (विधारा) वनस्पति – संपूर्ण आयुर्वेदिक जानकारी
Vidara / Samudrapatti Vanaspati Vishay Ayurvedic Aushadhi Mahiti






































