ब्राह्मी आयुर्वेदिक औषध महत्व
Brahmi Ayurvedic Aushadhi Mahatva
नामावली
• मराठी नाव : ब्राह्मी
• संस्कृत नाव : सरस्वती, सोमवल्ली, सौम्या, वयस्था, दिव्यतेजा, ब्राह्मी
• हिंदी नाव : जलनीम, ब्राह्मी, जलबूटी, जलब्राह्मी, नीरब्राह्मी, जलनेवरी
• लैटिन नाम : Bacopa monnieri
• अंग्रेज़ी नाम : Bacopa monnieri
पाई जाने वाले देश
यह वनस्पति विशेष रूप से दक्षिण एशिया महाद्वीप में पाई जाती है, विशेषतः भारत और उसके पड़ोसी देशों में।
पाई जाने की जगह
नदी घाटियों के निचले क्षेत्रों में, विशेषकर दलदली स्थानों और जलयुक्त भूमि में यह वनस्पति पाई जाती है।
ब्राह्मी वनस्पति के प्रकार
1. ब्राह्मी
2. नीर ब्राह्मी
3. मंडूकपर्णी
ब्राह्मी :
चपटी, छोटी, फैली हुई दंतीदार पत्तियों वाली, भूमि पर फैलने वाली लता।
नीर ब्राह्मी :
यह मुख्य ब्राह्मी मानी जाती है। यह छोटी घोल-भाजी जैसी दिखती है। इसमें छोटे पत्ते और छोटे फूल होते हैं। मांसल, मुलायम, रसदार तना होता है। यह एक भाजीवर्गीय वनस्पति है और अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
• फूल : छोटे, सफेद रंग के
• फल : छोटे आकार के, जिनमें बारीक बीज होते हैं
मंडूकपर्णी :
इस वनस्पति की पत्तियों के डंठल एक ही ओर होते हैं।
ब्राह्मी के औषधीय गुण
• रस : तिक्त, कषाय, मधुर
• विपाक : मधुर
• वीर्य : शीत
• दोषघ्नता : त्रिदोषशामक
• प्रभाव : उन्मादहर, उत्तेजक
ब्राह्मी का औषधीय महत्व :
🧠 मस्तिष्क से संबंधित
ब्राह्मी मस्तिष्क के लिए एक उत्तम टॉनिक है और एक वरदान मानी जाती है। यह अवसाद (डिप्रेशन), मानसिक तनाव, चिंता, अनिद्रा, स्मृतिभ्रंश, विस्मरण, अति शीघ्रता जैसी समस्याओं में उपयोगी है।
ब्राह्मी के सेवन से तनाव उत्पन्न करने वाले रस नियंत्रित होते हैं, बुद्धि का विकास होता है, स्मरणशक्ति बढ़ती है, नींद अच्छी आती है और मानसिक रोगों में लाभ मिलता है। निराशा की प्रवृत्ति में सुधार होता है।
• मिर्गी : यह मस्तिष्क से संबंधित रोग है, इसमें ब्राह्मी उपयोगी है।
• अल्ज़ाइमर रोग : स्मरणशक्ति सुधारने में ब्राह्मी सहायक है।
• विद्यार्थी, शिक्षक, इंजीनियर आदि के लिए मस्तिष्क को तल्लख रखने और कार्य-तनाव कम करने में सहायक है।
वात दोष
वात विकारों को कम करने में ब्राह्मी मदद करती है।
❤️ हृदय स्वास्थ्य
यह हृदय को मजबूत करती है, कोलेस्ट्रॉल कम करती है, रक्तसंचार सुधारती है और रक्तचाप नियंत्रित रखने में सहायक है।
🍽️ पाचन संस्था (Digestive System)
ब्राह्मी के सेवन से कभी-कभी भूख मंद हो जाती है। इसलिए पाचन सुधारने हेतु आहार में
अदरक और सेंधा नमक, सोंठ पाउडर, काली मिर्च, पिप्पली चूर्ण, सोंठ (त्रिकटु/त्रिगुणी औषधि) का सेवन लाभकारी होता है। इससे भूख और पाचन शक्ति बढ़ती है।
🌬️ प्राणवह स्रोतस (Respiratory System)
• सर्दी-खांसी व कफ विकार में छोटे बच्चों को ब्राह्मी रस देकर कफ को वमन द्वारा बाहर निकाला जाता है। यह प्रक्रिया आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही करनी चाहिए।
• बड़ों में भी यह चिकित्सा प्रभावी होती है।
• स्वरयंत्र विकार, आवाज बैठना, गले में खराश में ब्राह्मी, वासा, हरड़ और पिप्पली का संयुक्त सेवन अत्यंत लाभकारी है।
💇♂️ केश स्वास्थ्य
ब्राह्मी मानसिक तनाव कम करती है, मस्तिष्क और तंत्रिका कोशिकाओं की कार्यक्षमता बढ़ाती है, जिससे बालों का स्वास्थ्य सुधरता है।
ब्राह्मी रस सिर पर लगाने से या नारियल तेल में ब्राह्मी व भृंगराज पकाकर लगाने से बाल मजबूत होते हैं।
🚰 मूत्रवह संस्था (Urinary System)
ब्राह्मी एक जलीय वनस्पति है, इसलिए मूत्रविसर्जन बढ़ाती है।
मूत्र में जलन, पथरी, रक्तस्राव जैसी समस्याओं में यह उपयोगी है।
ब्राह्मी का सेवन कैसे करें
• 5–10 मिली रस या 125 मि.ग्रा. चूर्ण
• सुबह या रात को सोते समय, खाली पेट
• गुनगुने पानी, शहद या घी के साथ लें
बाजार में उपलब्ध औषधियाँ
ब्राह्मीप्राश, ब्रह्मीघृत, ब्राह्मीसिद्ध तेल, ब्राह्मी वटी, सारस्वतारिष्ट, सारस्वत घृत, सारस्वत चूर्ण आदि में ब्राह्मी का उपयोग होता है।
मात्रा व्यक्ति की प्रकृति और रोग के अनुसार तय की जाती है।
आहार में उपयोग
ब्राह्मी का पराठा, सब्ज़ी, जूस, चाय, काढ़ा बनाकर सेवन किया जा सकता है।
बाजार में ब्राह्मी कैप्सूल और गोलियां भी उपलब्ध हैं।
⚠️ टीप
कोई भी आयुर्वेदिक औषधि लेते समय अपनी वात-पित्त-कफ प्रकृति समझकर वैद्य की सलाह से ही सेवन करना उचित है।
इस प्रकार ब्राह्मी औषधीय वनस्पति के बारे में संपूर्ण जानकारी।
Brahmi Ayurvedic Aushadhi Mahatva.












