पानफुटी वनस्पति की आयुर्वेदिक जानकारी
Panfuti Plants Benefits of Health (Hindi)
• मराठी नाम : पानफुटी, घायमारी
• हिंदी नाम : पथ्थरचट्टा
• अंग्रेज़ी नाम : Bryophyllum Pinnatum, Kalanchoe pinnata
• मूलस्थान : मादागास्कर
• पाए जाने वाले स्थान : उष्ण एवं समशीतोष्ण कटिबंध
पानफुटी वनस्पति की संरचना
यह वनस्पति 1 से 2 मीटर तक ऊँची बढ़ती है। इसका तना नरम और हरे रंग का होता है। पत्ते अंडाकार आकार के होते हैं और उनके किनारों पर छोटे अर्धचंद्राकार कटाव होते हैं। यह पौधा सदाबहार होता है, यानी पूरे वर्ष हरा रहता है।
लागवड़ / प्रजनन
पानफुटी के औषधीय गुण एवं उपयोग
Panfuti Plants Benefits of Health
• किडनी और मूत्राशय रोग
किडनी खराबी, मूत्राशय रोग, लघवी न होना, मूत्रपथरी (मुतखड़ा) में पत्तों का रस पीना लाभदायक है। नियमित सेवन से मूत्राशय की पथरी टूटकर बाहर निकलने में मदद मिलती है।
• फोड़े
शरीर पर फोड़े होने पर पत्तों को गर्म करके पीसकर लेप लगाने से फोड़े ठीक होते हैं।
• जख्म (घाव)
पत्तों को पीसकर घाव पर लगाने से 4–5 दिनों में घाव भरने लगता है।
• उच्च रक्तचाप
पत्तों का रस निकालकर सेवन करने से उच्च रक्तचाप नियंत्रित रहता है तथा रक्त शुद्ध होता है।
• सिर दर्द
पत्तों को पीसकर रात को सोते समय सिर या माथे पर लगाने से सिरदर्द कम होता है।
• बवासीर (मूळव्याध)
इसके पत्तों का सेवन बवासीर में लाभकारी होता है।
• पाचन तंत्र के विकार
पेट से संबंधित विकारों में पानफुटी उपयोगी है।
• आँखों की जलन
पत्तों का रस निकालकर आँखों के चारों ओर लगाने से जलन और पानी आना कम होता है।
• सिरदर्द में नारियल तेल के साथ
पत्तों का रस नारियल तेल में मिलाकर माथे पर लगाने से सिरदर्द तुरंत कम होता है।
• महिलाओं में योनि संक्रमण
पत्तों का काढ़ा बनाकर उसमें 2 ग्राम शहद मिलाकर दिन में दो बार पीने से संक्रमण में लाभ होता है।
पानफुटी का सेवन कैसे करें?
• रोज सुबह खाली पेट 1–2 पत्ते चबाकर खाएँ।
• मूत्रपथरी में – पत्तों का रस शहद के साथ सुबह–शाम पिएँ।
• पानफुटी की पत्तियों की भाजी या पकौड़े बनाकर खाए जा सकते हैं।
• पत्ते गर्म पानी के साथ सुबह खाए जाएँ तो भी लाभ मिलता है।
• यदि आप कोई दवा ले रहे हों तो डॉक्टर की सलाह से सेवन करें।
यह पौधा खाद्य प्रकृति का है इसलिए सामान्यतः हानिकारक नहीं होता।
ये हैं पानफुटी वनस्पति के प्रमुख फायदे।
Panfuti Plants Benefits of Health



