🌿 मसाले वेलदोडे / बड़ी इलायची (Black Cardamom) – आयुर्वेदिक औषधीय जानकारी (हिंदी)
🔶 वेलदोडे (Cardamom) – Basic Information of Medicine
🔹 सामान्य परिचय
मराठी नाम : वेलदोडे, वेलची / मोठे वेलदोडे (Black Cardamom)
हिंदी नाम : बड़ी इलायची, काली इलायची / भूरी इलायची
अंग्रेज़ी नाम : Black Cardamom / Greater Cardamom / Indian Cardamom
संस्कृत नाम : स्थूलैला, बृहदेला, भद्रैला, दिव्यगंधा, निष्कुटि आदि
वैज्ञानिक (Botanical) नाम : Amomum subulatum Roxb.
कुल (Family) : जिंजिबेरेसी कुल (Zingiberaceae)
🔸 सूक्ष्म स्पष्टीकरण
इलायची मसाला मुख्यतः दो प्रकार का होता है –
1. Elettaria cardamomum (हरी / छोटी इलायची)
2. Amomum subulatum (Black Cardamom / बड़ी या काली इलायची)
🌱 वनस्पति संरचना (Plant Structure)
🌿 संरचनात्मक विवरण
पारिवारिक समूह : Zingiberaceae (अदरक कुल)
प्रकार : सदाबहार, बहुवर्षीय शाकीय वनस्पति
🌿 तना / मूल
इसका तना भूमि के नीचे स्थित होता है जिसे राइजोम (Rhizome) कहते हैं।
यह राइजोम मोटा, मांसल एवं विस्तृत होता है।
इसी राइजोम से नई पत्तियाँ और फूल विकसित होते हैं।
🌿 पत्तियाँ
पत्तियाँ लंबी, हरी, linear-lanceolate (भाले जैसी आकृति वाली) होती हैं।
🌸 फूल
फूल छोटे, हल्के हरे या पीले रंग के होते हैं।
कभी-कभी इनमें सफेद या हल्की बैंगनी आभा दिखाई देती है।
🌰 फल / बीज
फल फली (Pods) के रूप में लगते हैं।
ये फल सामान्यतः तीन कोनों वाले त्रिकोणाकार होते हैं।
प्रत्येक फली में अनेक काले-भूरे बीज पाए जाते हैं।
इन्हीं बीजों का उपयोग मसाले एवं औषधि के रूप में किया जाता है।
🔍 तुलना
हरी इलायची (Elettaria) की तुलना में
काली इलायची (Amomum) की फलियाँ आकार में बड़ी, रंग में गहरी तथा
धुएँ और कपूर जैसी तीव्र सुगंध व स्वाद वाली होती हैं।
🌾 जीवन जानकारी (Life / Habitat / Growing)
🌱 प्राकृतिक निवास
पश्चिमी घाट, भारतीय हिमालय, श्रीलंका तथा अन्य उष्णकटिबंधीय क्षेत्र।
☀️ आवश्यक परिस्थितियाँ
गर्म एवं आर्द्र जलवायु
हल्की, उपजाऊ व नम मिट्टी
छायादार स्थान तथा संतुलित आर्द्रता
🌿 वृद्धि एवं उत्पादन
राइजोम से नई कोपलें निकलती हैं
फूल आने के बाद फलियाँ बनती हैं
फलियों को सुखाकर उपयोग में लाया जाता है
पारंपरिक विधि में आग/धुएँ पर सुखाकर विशेष सुगंध विकसित की जाती है
🔸 इलायची दुनिया के महंगे मसालों में से एक है।
भारत, नेपाल, भूटान आदि देशों में इसकी भारी मांग है।
🍛 उपयोग (Uses)
✨ पाककला में उपयोग
सब्ज़ी, करी, पुलाव, बिरयानी, गरम मसाले में प्रयोग
कुछ क्षेत्रों में चाय या मसाला-चाय में भी उपयोग
🔥 गुण
स्वाद में कड़वा व तीखा
शरीर में ऊष्मा बढ़ाने वाला
🌿 आयुर्वेदिक औषधीय गुण (Medicinal / Traditional Uses)
• यदि पेट में गैस की समस्या हो रही हो, तो मसाले वाली बड़ी इलायची के 8–10 बीज भोजन के बाद चबाकर खाएँ और ऊपर से गुनगुना पानी पिएँ। इससे गैस व अपच की समस्या दूर होती है।
• हृदय रोग हो, साँस लेने में तकलीफ़ आती हो, तो भोजन के आधे घंटे बाद इलायची को चबाकर खाने से धीरे-धीरे समस्या में सुधार होने लगता है।
• यदि कैंसर की समस्या हो, तो इलायची के बीजों का पाउडर 1–2 चुटकी गर्म पानी में डालकर भोजन के एक घंटे बाद लगातार लेने से कैंसर कोशिकाएँ नियंत्रित होने लगती हैं।
• पुरुषों में नामर्दी बढ़ रही हो, संभोग के समय कठिनाई होती हो, तो इसके लिए 2–3 चम्मच बीजों का पाउडर गर्म पानी के साथ सुबह-शाम लेना लाभकारी होता है।
• नींद न आती हो और सिर भारी लगता हो, तो बड़ी इलायची को चंदन की तरह घिसकर सिर पर लेप लगाने से फायदा होता है।
• पेट में गर्मी बढ़ने पर तथा रक्त में उष्णता के कारण शरीर पर फोड़े-फुंसियाँ, पस आदि हो रहे हों, तो भोजन से पहले सुबह-शाम 8–10 दाने चबाकर खाएँ। फोड़े फूटकर पस बाहर निकल जाती है या सूखकर ठीक हो जाते हैं। आराम मिलता है और रक्त शुद्ध होता है।
• शरीर पर हुए फोड़ों पर नारियल के तेल में इलायची और उसके बीजों का चूर्ण पकाकर वह तेल लगाने से गंदगी निकल जाती है और रक्त शुद्ध होने में मदद मिलती है।
• मुँह के अंदर फोड़े होना, छाले पड़ना – इसके लिए बड़ी इलायची के बीजों का चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लेने से आराम मिलता है।
• दाँत में दर्द हो, तो बड़ी इलायची के बीजों की पाउडर को गर्म पानी में उबालकर उससे गरारे करने पर दाँत दर्द कम होता है और कीड़ा लगे दाँत की समस्या में मदद मिलती है।
• यदि मुँह से बदबू आती हो, तो इलायची खाना फायदेमंद होता है। दुर्गंध दूर होती है।
• हिचकी लगने पर मसाले वाली इलायची को एक कप गर्म पानी में उबालें, उसे आधा कप होने दें। फिर उसमें गुड़ मिलाकर पीने से लाभ होता है।
• गरम-ठंडा भोजन एक साथ खाने से फूड पॉयज़निंग हो जाए, तो बड़ी इलायची को कूटकर गर्म पानी में उबालें। वह पानी ठंडा करके उसमें मिश्री डालकर पीने से पाचन तंत्र ठीक होता है।
• मूत्र मार्ग में संक्रमण हो, पेशाब में जलन या परेशानी हो, तो ताँबे के बर्तन में रात को पानी भरें। उसमें इलायची के बीजों का चूर्ण डालकर रातभर रखें। सुबह उठकर वह पानी पीने से पेशाब साफ होती है, जलन कम होती है और संक्रमण दूर होने में मदद मिलती है।
• स्वप्न दोष की समस्या हो, तो इलायची के बीजों का चूर्ण एक गिलास पानी में डालकर मिश्री मिलाकर पीने से लाभ होता है।
• बुखार आने पर इलायची के बीजों की पाउडर 1–2 चुटकी मिश्री वाले पानी के साथ बार-बार पीने से बुखार कम होता है। उसके कीटाणु मूत्र व शौच मार्ग से बाहर निकलने में मदद मिलती है और ताप कम होता है।
🌰 उपयोगी भाग
फल / फली (Pod) – मसाले के रूप में
बीज (Seeds) – औषधीय व सुगंध हेतु
⚠️ सावधानी
औषधि के रूप में प्रयोग करते समय मात्रा एवं प्रकृति अनुसार आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह आवश्यक है।
पित्त दोष या पित्त की गांठ होने पर बड़ी इलायची का सेवन वर्जित है या केवल चिकित्सक की सलाह से करें।
🌿 निष्कर्ष
इस प्रकार मसाले वेलदोडे / बड़ी इलायची (Black Cardamom) की यह संपूर्ण आयुर्वेदिक औषधीय जानकारी है।




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