🌿 नागरमोथा वनस्पति के बारे में आयुर्वेदिक जानकारी
(Nagarmotha Vanaspati – Ayurvedic Aushadhi Mahiti)
🔹 नाम
🔹 मराठी नाम : नागरमोथा, लवाळा, लवगा
🔹 हिंदी नाम : नागरमोथा, लवगा, मुस्ता
🔹 अंग्रेज़ी नाम : Nut Grass, Purple Nut Sedge
🔹 वैज्ञानिक नाम : Cyperus rotundus Linn.
🌱 वनस्पति की पहचान
🔹 वनस्पति का प्रकार : बहुवर्षीय (Perennial) औषधीय खरपतवार (तणयुक्त) वनस्पति
🔹 ऊँचाई : लगभग 30 से 60 सेमी
🔹 पत्तियाँ : लंबी, संकरी, नुकीली, गहरे हरे रंग की, घास जैसी दिखाई देने वाली
🔹 फूल : छोटे, भूरे से बैंगनी रंग के, छत्र (Umbel) आकार के पुष्पक्रम में आते हैं। ग्रीष्म व वर्षा ऋतु में पुष्पन होता है।
🔹 जड़ / कंद : भूमिगत गोलाकार, तीव्र सुगंधित कंद। औषधि में मुख्यतः इसी का उपयोग किया जाता है।
🌿 आयुर्वेदिक गुणधर्म
🔹 रस (Taste) : तिक्त (कड़वा), कषाय
🔹 गुण : लघु (हल्का), रूक्ष (शुष्क)
🔹 वीर्य : शीत (ठंडा)
🔹 विपाक : कटु
🔹 दोषों पर प्रभाव : कफ और पित्त दोष का शमन करता है
🩺 🌿 नागरमोथा वनस्पति का औषधीय महत्व
नागरमोथा का उपयोग आयुर्वेद में अनेक रोगों के उपचार में किया जाता है।
इस वनस्पति के कंद की पाउडर बनाई जाती है। इस पाउडर को नारियल के तेल में पकाकर त्वचा रोगों पर लगाने के लिए उपयोग किया जाता है। साथ ही इस पाउडर को सीधे मलने के लिए भी प्रयोग किया जाता है।
कंद को कूटकर पानी में उबालते हैं, फिर उस पानी को ठंडा करके पीने के लिए उपयोग किया जाता है।
पाचन तंत्र पर उपयोग
नागरमोथा अतिसार, बार-बार दस्त लगना, पेट में कृमि होना, पेट फूलना, अपच, दस्त, चिपचिपा मल जैसी समस्याओं में उपयोगी है।
यह दीपक और पाचक वनस्पति होने के कारण भूख बढ़ाती है, मल को सोखती है, भोजन पचाती है और आंत्र (अन्ननलिका) की क्रिया को सुचारु करती है।
अपच व चिपचिपे दस्त पर उपाय
यदि भोजन ठीक से न पचता हो या चिपचिपा मल आता हो तो
नागरमोथा चूर्ण 3 ग्राम और अदरक का रस 1 चम्मच मिलाकर सुबह-शाम नाश्ते के बाद और भोजन के बाद लेना चाहिए।
इसका सेवन 10 से 15 दिनों तक करने से पाचन क्रिया ठीक होती हैl
पेट के कृमि (जंत) नाश के लिए
पेट में कृमि होने पर पहले गुड़ खाकर पानी पीना चाहिए।
उसके 15 मिनट बाद नागरमोथा चूर्ण 5 ग्राम लेना चाहिए।
गुड़ के कारण कृमि पेट में ऊपर आ जाते हैं और उसके बाद नागरमोथा लेने से वे नष्ट हो जाते हैं।
यह उपाय लगातार 5 दिन, दिन में एक बार करना चाहिए।
शक्तिवर्धक गुण
नागरमोथा भोजन को पचाने वाली होने के कारण शक्ति बढ़ाने वाली वनस्पति मानी जाती है।
महिलाओं के लिए उपयोग
प्रसव के बाद महिलाओं की कोख (गर्भाशय) फैल जाती है, उसे संकुचित करने के लिए नागरमोथा उपयोगी है।
साथ ही मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव होने पर उसे नियंत्रित करने तथा स्तन्य (दूध) वृद्धि के लिए भी नागरमोथा लाभकारी है।
कुटज वनस्पति के साथ उपयोग
यदि लूज मोशन, दस्त या कब्ज की समस्या हो तो
कुटज वनस्पति की छाल 3 ग्राम लें।
इसे 150 ग्राम पानी में उबालकर 75 ग्राम शेष रहने तक पकाएँ।
यह काढ़ा सुबह और शाम खाली पेट लेना लाभदायक होता है।
💊 औषधीय रूप में उपयोग
⚠️ सावधानियाँ
🔹 अधिक मात्रा में सेवन न करें
🔹 गर्भवती महिलाओं को चिकित्सक / वैद्य की सलाह से ही उपयोग करना चाहिए l
🔹 निष्कर्ष
इस प्रकार नागरमोथा वनस्पति से संबंधित आयुर्वेदिक औषधीय जानकारी अत्यंत उपयोगी है।
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