कोथंबीर / हरे धनिये की औषधीय जानकारी
Kothambir / Hara Dhaniya plant medicinal information
मराठी नाव : कोथंबीरी, धने
हिंदी नाव : हरा धनिया, धनिया
संस्कृत नाम : धन्यक / कुस्तुम्बरी
अंग्रेज़ी नाम : Coriander
(पत्तियाँ हों तो: Coriander Leaves / Cilantro
बीज हों तो: Coriander Seeds)
वैज्ञानिक / शास्त्रीय नाम : Coriandrum sativum
🌱 पौधे की ऊँचाई
• धनिये का पौधा सामान्यतः 30 से 70 सेमी तक ऊँचा बढ़ता है।
• अनुकूल जलवायु और उचित देखभाल मिलने पर पौधा अधिक घना और हरा-भरा होता है।
🍃 पत्तियों का आकार
• निचली पत्तियाँ चौड़ी, गोलाकार तथा कटी-फटी (खंडित) होती हैं।
• ऊपरी पत्तियाँ पतली, लंबी और पंख जैसी दिखाई देती हैं।
• पत्तियाँ हरे रंग की तथा सुगंधित होती हैं।
🌼 फूल
• फूल छोटे, सफ़ेद या हल्के गुलाबी रंग के होते हैं।
• पुष्पक्रम छत्राकार (Umbel) प्रकार का होता है।
• सामान्यतः 45–60 दिनों में फूल आते हैं।
🌰 फल
• फल छोटे, गोल तथा सुगंधित होते हैं।
• प्रारंभ में हरे, बाद में पीले से भूरे रंग के हो जाते हैं।
• पूरी तरह सूखने पर इन्हें धनिया कहा जाता है।
• प्रत्येक फल में सामान्यतः 2 बीज होते हैं।
• भोजन बनाते समय लगभग सभी व्यंजनों में धनिये का उपयोग किया जाता है। यह एक मसाला फसल है और भारत में सर्वत्र इसकी खेती की जाती है।
🌿 गुणधर्म
• स्वाद कड़वा, मीठा व तिक्त होता है।
• उष्ण गुण वाला, लघु (हल्का) और पचने में आसान होता है।
• स्निग्ध होने से इसमें आर्द्रता (नमी) रहती है।
• यह त्रिदोषनाशक है – वात, पित्त और कफ दोषों पर प्रभावी है।
• हरा धनिया (कोथंबीर) त्रिदोष विकारों में लाभकारी होता है।
🌿 धनिये के औषधीय महत्व
• मूत्राशय में पथरी (मूतखड़ा) होने पर –
धनिया या उसके बीज कूटकर या चूर्ण बनाकर पानी में 5–6 मिनट उबालें। ठंडा करके सुबह खाली पेट और रात को सोते समय सेवन करें, लाभ होता है।
• पेट में गैस की समस्या में –
दो कप पानी में जीरा, धनिया, चाय पत्ती, सौंफ, अदरक और थोड़ी-सी शक्कर डालकर चाय की तरह उबालें। इसे पीने से पाचन क्रिया सुधरती है और गैस की समस्या दूर होती है।
अपच, भूख न लगना, अधिक प्यास, पित्त विकार, मतली, उलटी, चिपचिपा दस्त, बवासीर, पेट दर्द और आँतों के कीड़े में भी धनिया उपयोगी है।
• पित्त बढ़ने से होने वाली समस्याएँ –
शरीर में जलन, चकत्ते, पेशाब में जलन या दर्द, अधिक गर्मी महसूस होना – इन सबमें धनिया या हरा धनिया लाभकारी है। यह मूत्र के माध्यम से शरीर की अतिरिक्त गर्मी बाहर निकालता है।
• बच्चों में पेट के कीड़े –
एक चम्मच धनिया चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से कीड़ों की समस्या कम होती है।
• बड़ों में पित्त विकार –
¼ चम्मच धनिया चूर्ण और उतनी ही मिश्री पानी के साथ लेने से लाभ होता है।
• कफ विकार, खाँसी और साँस फूलने पर –
½ चम्मच धनिया पाउडर, ½ चम्मच मुलेठी चूर्ण और 1 कप पानी उबालकर आधा कप करें। ठंडा करके थोड़ा-थोड़ा पिएँ, लाभ होता है।
• अधिक दवाइयों से शरीर में बढ़ी गर्मी में –
एक चम्मच धनिया चूर्ण पानी में उबालकर ठंडा करें, रातभर रखें और सुबह पिएँ। शरीर की उष्णता कम होती है।
• नाक से खून आने पर –
हरा धनिया, 20 ग्राम पानी और कपूर मिलाकर पीस लें। रस छानकर उसकी 2-2 बूँद नाक में डालें और माथे पर लगाएँ। नाक से खून आना बंद होता है।
• आँखों में जलन होने पर –
सौंफ, शक्कर और धनिया समान मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाएँ। भोजन के बाद रोज़ 6 ग्राम सेवन करने से आँखों और हाथ-पैरों की जलन कम होती है।
• रक्त में इंसुलिन नियंत्रण –
धनिया रक्त शर्करा नियंत्रण में सहायक है। रोज़ आहार में धनिया या उसका चूर्ण लाभकारी है।
• रोग प्रतिरोधक शक्ति –
विटामिन A और C अधिक मात्रा में होने से इम्यूनिटी बढ़ती है।
• दस्त की समस्या (सर्दियों में) –
भोजन में धनिया शामिल करने से पेट को आराम मिलता है।
• कोलेस्ट्रॉल कम करने में –
धनिया हृदय और रक्तवाहिनियों को मज़बूत करता है।
• महिलाओं में मासिक धर्म के दर्द में –
आधा लीटर पानी में 6 ग्राम धनिया चूर्ण और मिश्री मिलाकर पीने से आराम मिलता है।
• शरीर की गर्मी व डिटॉक्स के लिए –
विटामिन A, C, कैल्शियम और मैग्नीशियम अधिक होने से धनिया पानी या हरा धनिया शरीर की शुद्धि और गर्मी कम करने में सहायक है।
• खाँसी, प्यास, बुखार, आँखों का दर्द, उलटी –
½ चम्मच धनिया पाउडर और ½ चम्मच मिश्री साथ में लेने से लाभ होता है, भूख बढ़ती है और मन शांत होता है।
इस प्रकार कोथंबीर अर्थात धनिया एक अत्यंत उपयोगी आयुर्वेदिक औषधीय वनस्पति है।




