बबूल के पेड़ का औषधीय महत्व
Babul jhad ke aushadhi upyog (Hindi)
• हिंदी नाम : बबूल, कीकर
• मराठी नाम : बाबुळ, हिवर
• संस्कृत नाम : बबूलः (Babulah), संख्यााह्व, पुत्रंजीव, रजनीगंधा (कुछ ग्रंथों में)
• लैटिन / वैज्ञानिक नाम : Vachellia nilotica (पूर्व नाम: Acacia nilotica)
पत्तियाँ (Leaves)
• लाजवंती की पत्तियों जैसी, छोटी, मुलायम और पंख जैसी संरचना।
फूल (Flowers)
• गोल, पीले रंग के, छोटे-छोटे गुच्छों में खिलने वाले।
तना (Stem)
• बहुत कठोर, मजबूत, भूरे या काले रंग का।
शाखाएँ (Branches)
• कांटेदार, पतली लेकिन काफी मजबूत, जोड़ी में नुकीले काँटों वाली।
कहाँ पाई जाती है? (Habitat)
• कम पानी वाले क्षेत्रों में आसानी से उगती है।
• गर्म और शुष्क जलवायु वाले राज्यों में अधिक पाई जाती है।
• खेतों में, खाली जमीन, बांधों पर प्राकृतिक रूप से उगती है।
• सूखी, रेतीली और रुक्ष मिट्टी में अच्छी बढ़त।
शाखाओं का विशेष उपयोग – दातून
• बबूल की ताज़ी शाखाओं से दातून करने की परंपरा प्राचीन समय से है।
• दातून करने से दांत साफ होते हैं, पीलापन कम होता है और मसूड़े मजबूत होते हैं।
• सूखी डंडी को पानी में भिगोकर भी दातून किया जाता है।
• नियमित उपयोग से दांतों का संपूर्ण स्वास्थ्य सुधरता है।
फल (Pods / Shenga)
• लंबी फली जैसी शेंगें, जिनमें छोटे-छोटे गोल बीजकक्ष होते हैं।
• रंग हरा से लेकर भूरा।
औषधीय उपयोग वाले भाग
• पत्तियाँ, शेंगा/फल, फांदियाँ, छाल (साल), डिंक (गोंद)।
🌿 पत्तियों के औषधीय उपयोग
• मुँह के छाले, दांत दर्द, मुँह में इंफेक्शन में उपयोगी।
• मुँह की बदबू दूर करती है।
• ताज़ी पत्तियाँ चबाने से मसूड़े मजबूत होते हैं और दांत साफ रहते हैं।
• पायरिया, दांतों का पीलापन, बदबू कम करने में मदद।
• पत्तियों का चूर्ण बनाकर उसमें नमक मिलाकर दंतमंजन के रूप में उपयोग किया जाता है।
• नियमित उपयोग से 7–8 दिनों में लाभ।
🌿 शेंगा (फलों) के औषधीय उपयोग
• शेंगों के बीज सुखाकर हल्का गर्म करके चूर्ण तैयार करें।
• यह चूर्ण 1 चम्मच कोमट पानी के साथ भोजन के 1 घंटे बाद लें।
• स्त्रियों के अधिक रक्तस्राव, सफेद पानी, माहवारी दर्द में उपयोगी।
• बवासीर, त्वचा के रोग, खुजली में लाभ।
• हड्डियों और जोड़ों के दर्द, कमर दर्द, घुटनों के दर्द में आराम।
• ऊर्जा और ताकत बढ़ाता है।
🌿 डिंक (गोंद) के औषधीय उपयोग
• बबूल का गोंद चिपचिपा, काँच जैसा और गहरा रंग का होता है।
• शरीर की थकान दूर करता है, शक्ति और ऊर्जा बढ़ाता है।
• कैल्शियम व मिनरल्स से भरपूर – हड्डियों को मजबूत करता है।
• सांधेदर्द, हड्डियों का दर्द, सूजन और वात विकार में लाभदायक।
• कोरखा खांसी, मुँह सूखना, मुँह के छाले में आराम।
• डिंक पाउडर, क्रिस्टल या सीधे पेड़ से निकाला हुआ उपयोग किया जाता है।
• डिंक के लड्डू सर्दियों में ताकद बढ़ाने के लिए खाए जाते हैं।
• डिंक को भिगोकर दूध में, घी में भूनकर, या टॉफी की तरह चबाकर भी खाया जाता है।
बबूल की छाल – दांत और जीभ के लिए लाभकारी
• दांतों का पीलापन कम करती है।
• दांत हिलना, मसूड़ों से खून आना में उपयोगी।
• छाल को पानी में कूटकर उबालें और उस पानी से कुल्ला करें या पिएँ।
• दिन में दो बार करने से लाभ।
• जीभ का पीलापन और सफेद परत कम होती है।
• छाल का चूर्ण बनाकर भी उपयोग किया जा सकता है।
बबूल की लकड़ी के उपयोग
• घर बनाने में उपयोग।
• खेती के औजार बनाने में उपयोग।
• ईंधन के रूप में प्रयोग।
• बबूल का गोंद लाख बनाने वाली कीटियों का भोजन है।
• तैयार लाख रंग व उद्योगों में प्रयुक्त होती है।
• इसमें Tyanin (टैनिन) पाया जाता है जो औषधीय महत्व रखता है।
• पत्तियाँ पशुओं के चारे के रूप में उपयोग होती हैं।
अन्य औषधीय उपयोग
• सर्दी-खाँसी में उपयोगी।
• कमर दर्द, जोड़ों का दर्द कम करने में सहायक।
• दस्त/पतले शौच में शेंगों का चूर्ण + शहद लाभकारी।
• अबालवृद्ध – बच्चे, बड़े, बुजुर्ग सभी ले सकते हैं।
ऐसे हैं बबूल पौधे के आयुर्वेदिक फायदे।
• कोई भी दवा आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से लें।
Babul jhad ke aushadhi upyog – Hindi me.










