बबूल के पेड़ का औषधीय महत्व Babul jhad ke aushadhi upyog (Hindi) लेबल असलेली पोस्ट दाखवित आहे. सर्व पोस्ट्‍स दर्शवा
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शुक्रवार, ५ डिसेंबर, २०२५

बबूल के पेड़ का औषधीय महत्व Babul jhad ke aushadhi upyog (Hindi)


बबूल के पेड़ का औषधीय महत्व

Babul jhad ke aushadhi upyog (Hindi)

बबूल के पेड़ का औषधीय महत्व  Babul jhad ke aushadhi upyog (Hindi)


• हिंदी नाम : बबूल, कीकर

• मराठी नाम : बाबुळ, हिवर

• संस्कृत नाम : बबूलः (Babulah), संख्यााह्व, पुत्रंजीव, रजनीगंधा (कुछ ग्रंथों में)

• लैटिन / वैज्ञानिक नाम : Vachellia nilotica (पूर्व नाम: Acacia nilotica)


पत्तियाँ (Leaves)

• लाजवंती की पत्तियों जैसी, छोटी, मुलायम और पंख जैसी संरचना।

बबूल के पेड़ का औषधीय महत्व  Babul jhad ke aushadhi upyog (Hindi)


फूल (Flowers)

• गोल, पीले रंग के, छोटे-छोटे गुच्छों में खिलने वाले।

बबूल के पेड़ का औषधीय महत्व  Babul jhad ke aushadhi upyog (Hindi)


तना (Stem)

• बहुत कठोर, मजबूत, भूरे या काले रंग का।


शाखाएँ (Branches)

• कांटेदार, पतली लेकिन काफी मजबूत, जोड़ी में नुकीले काँटों वाली।


कहाँ पाई जाती है? (Habitat)

• कम पानी वाले क्षेत्रों में आसानी से उगती है।

• गर्म और शुष्क जलवायु वाले राज्यों में अधिक पाई जाती है।

• खेतों में, खाली जमीन, बांधों पर प्राकृतिक रूप से उगती है।

• सूखी, रेतीली और रुक्ष मिट्टी में अच्छी बढ़त।



शाखाओं का विशेष उपयोग – दातून

• बबूल की ताज़ी शाखाओं से दातून करने की परंपरा प्राचीन समय से है।

• दातून करने से दांत साफ होते हैं, पीलापन कम होता है और मसूड़े मजबूत होते हैं।

• सूखी डंडी को पानी में भिगोकर भी दातून किया जाता है।

• नियमित उपयोग से दांतों का संपूर्ण स्वास्थ्य सुधरता है।

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फल (Pods / Shenga)

• लंबी फली जैसी शेंगें, जिनमें छोटे-छोटे गोल बीजकक्ष होते हैं।

• रंग हरा से लेकर भूरा।

औषधीय उपयोग वाले भाग

• पत्तियाँ, शेंगा/फल, फांदियाँ, छाल (साल), डिंक (गोंद)।


🌿 पत्तियों के औषधीय उपयोग

• मुँह के छाले, दांत दर्द, मुँह में इंफेक्शन में उपयोगी।

• मुँह की बदबू दूर करती है।

• ताज़ी पत्तियाँ चबाने से मसूड़े मजबूत होते हैं और दांत साफ रहते हैं।

• पायरिया, दांतों का पीलापन, बदबू कम करने में मदद।

• पत्तियों का चूर्ण बनाकर उसमें नमक मिलाकर दंतमंजन के रूप में उपयोग किया जाता है।

• नियमित उपयोग से 7–8 दिनों में लाभ।

बबूल के पेड़ का औषधीय महत्व  Babul jhad ke aushadhi upyog (Hindi)


🌿 शेंगा (फलों) के औषधीय उपयोग

• शेंगों के बीज सुखाकर हल्का गर्म करके चूर्ण तैयार करें।

• यह चूर्ण 1 चम्मच कोमट पानी के साथ भोजन के 1 घंटे बाद लें।

• स्त्रियों के अधिक रक्तस्राव, सफेद पानी, माहवारी दर्द में उपयोगी।

• बवासीर, त्वचा के रोग, खुजली में लाभ।

• हड्डियों और जोड़ों के दर्द, कमर दर्द, घुटनों के दर्द में आराम।

• ऊर्जा और ताकत बढ़ाता है।

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🌿 डिंक (गोंद) के औषधीय उपयोग

• बबूल का गोंद चिपचिपा, काँच जैसा और गहरा रंग का होता है।

• शरीर की थकान दूर करता है, शक्ति और ऊर्जा बढ़ाता है।

• कैल्शियम व मिनरल्स से भरपूर – हड्डियों को मजबूत करता है।

• सांधेदर्द, हड्डियों का दर्द, सूजन और वात विकार में लाभदायक।

• कोरखा खांसी, मुँह सूखना, मुँह के छाले में आराम।

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• डिंक पाउडर, क्रिस्टल या सीधे पेड़ से निकाला हुआ उपयोग किया जाता है।

• डिंक के लड्डू सर्दियों में ताकद बढ़ाने के लिए खाए जाते हैं।

• डिंक को भिगोकर दूध में, घी में भूनकर, या टॉफी की तरह चबाकर भी खाया जाता है।

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बबूल की छाल – दांत और जीभ के लिए लाभकारी

• दांतों का पीलापन कम करती है।

• दांत हिलना, मसूड़ों से खून आना में उपयोगी।

• छाल को पानी में कूटकर उबालें और उस पानी से कुल्ला करें या पिएँ।

• दिन में दो बार करने से लाभ।

• जीभ का पीलापन और सफेद परत कम होती है।

• छाल का चूर्ण बनाकर भी उपयोग किया जा सकता है।

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बबूल की लकड़ी के उपयोग

• घर बनाने में उपयोग।

• खेती के औजार बनाने में उपयोग।

• ईंधन के रूप में प्रयोग।

• बबूल का गोंद लाख बनाने वाली कीटियों का भोजन है।

• तैयार लाख रंग व उद्योगों में प्रयुक्त होती है।

• इसमें Tyanin (टैनिन) पाया जाता है जो औषधीय महत्व रखता है।

• पत्तियाँ पशुओं के चारे के रूप में उपयोग होती हैं।

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अन्य औषधीय उपयोग

• सर्दी-खाँसी में उपयोगी।

• कमर दर्द, जोड़ों का दर्द कम करने में सहायक।

• दस्त/पतले शौच में शेंगों का चूर्ण + शहद लाभकारी।

• अबालवृद्ध – बच्चे, बड़े, बुजुर्ग सभी ले सकते हैं।

ऐसे हैं बबूल पौधे के आयुर्वेदिक फायदे।

• कोई भी दवा आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से लें

Babul jhad ke aushadhi upyog – Hindi me.


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