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रविवार, ३० नोव्हेंबर, २०२५

सदाफूली का औषधीय महत्व Sadaphuli ke aushadhi mahatva


सदाफूली का औषधीय महत्व

Sadaphuli ke aushadhi mahatva

सदाफूली का औषधीय महत्व  Sadaphuli ke aushadhi mahatva


• मराठी नाम: सदाफुली, संगखी, तिलोनी

• हिंदी नाम: सदाबहार, नयनतारा, बारहमासी

• अंग्रेज़ी नाम: Periwinkle Flower / Vinca rosea

• लैटिन नाम: Lochnera Rosea

• संस्कृत नाम: सदाफुली

सदाफूली का औषधीय महत्व  Sadaphuli ke aushadhi mahatva


सदाफूली का औषधीय महत्व

Sadaphuli ke aushadhi mahatva

• मूलस्थान: दक्षिण अफ्रीका के मादागास्कर में।

• प्रकार: 1) सफेद सदाबहार, 2) गुलाबी सदाबहार।

• यह एक छोटा पौधा है। घर के पास, बगीचे में, गमलों में तथा परसबाग में इसकी खेती की जाती है।

• पत्ते: पत्ते छोटे और अंडाकार आकार के होते हैं।

सदाफूली का औषधीय महत्व  Sadaphuli ke aushadhi mahatva


फूल:

• इस पौधे पर रोज फूल खिलते हैं। छोटी खोखली डंडी पर पाँच पंखुड़ियाँ होती हैं।

फल:

• छोटे-छोटे फल (फली) होते हैं जिनमें सरसों जैसी बारीक बीज होते हैं।

सदाफूली का औषधीय महत्व

Sadaphuli ke aushadhi mahatva

सदाफूली का औषधीय महत्व  Sadaphuli ke aushadhi mahatva


• औषधीय उपयोग:

• सदाबहार के फूलों का अर्क निकालकर मधुमेह रोगी को देने से रक्त में बढ़ी हुई शुगर नियंत्रित होती है।

• इसके जड़ में मौजूद घटकों के कारण जड़ व फूल को पानी में उबालकर थोड़ा-थोड़ा सेवन करने से रक्त शर्करा नियंत्रित होती है, तनाव कम होता है तथा रक्तचाप नियंत्रित रहता है। जड़ व छाल वेदनाशामक होने से उसकी पेस्ट बनाकर लगाई जाती है।

• शरीर के मूलाधार चक्र में असंतुलन होने पर पेट तथा पैरों के रोग उत्पन्न होते हैं, पक्षाघात भी हो सकता है। इस पर इसका फूल रस सेवन करने से मूलाधार चक्र संतुलित होता है।

• बवासीर होने पर सदाबहार की पत्तियों को चूरकर उसका लेप बवासीर के स्थान पर लगाने से आराम व लाभ होता है।

• बार-बार सिरदर्द, नींद न आना, मानसिक तनाव व चिड़चिड़ापन होने पर सदाबहार के फूल उबले पानी में डालकर 2 मिनट रखें और फिर वह पानी ठंडा कर पिएँ। इससे लाभ मिलता है। पत्तियों का मुरब्बा बनाकर रोज थोड़ा सेवन करने से अच्छी नींद आती है।

• चेहरे पर दाग, फोड़े, मवाद वाले फोड़े तथा शरीर पर कहीं भी उठे फोड़ों पर फूल या फूल-पत्ते चूरकर लगाने से फोड़े सूखते हैं व दाग भी दूर होते हैं।

• पत्तियों में जीवाणुनाशक गुण होने से इनका लेप घाव पर लगाया जाता है।

• मधुमक्खी, बिच्छू या अन्य कीड़े काटने पर फूल-पत्तों को पीसकर लगाने से दर्द व सूजन में राहत मिलती है।

• शरीर में खुजली हो तो सदाबहार के फूल-पत्ते व नीम पत्ते समान मात्रा में पीसकर दिन में तीन बार लगाने से खुजली ठीक होने में मदद मिलती है।

• दो-चार फूल पानी में उबालकर वह पानी पीने से रक्तचाप कम होता है।

• खरोंच या घाव होने पर पत्तों का रस लगाने से लाभ मिलता है।

• बाल झड़ना कम करने के लिए पत्तों का रस बालों में लगाने से फायदा होता है।

• सदाबहार पर अनुसंधान हुआ है। कैंसर रोग में इसका उपयोग होता है। विशेष रूप से ल्यूकेमिया यानी रक्त कैंसर में यह लाभदायक पाया गया है। कैंसर में दी जाने वाली कीमोथेरपी में भी सदाबहार आधारित औषधियाँ उपयोग की जा रही हैं।

• मासिक धर्म में अधिक रक्तस्त्राव या कष्ट होने पर पत्ते गरम पानी में रातभर भिगोकर उसका अर्क पीने से लाभ मिलता है।

सदाफूली उपयोग करते समय सावधानियाँ:

• यह पौधा औषधीय होने के कारण इसका सेवन आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए।

• घाव, फोड़े, कीड़े-मकौड़े के काटने पर लगाने में कोई खतरा नहीं है।

• इस पौधे के आसपास साँप, बिच्छू जैसे जीव नहीं आते क्योंकि यह विष प्रधान है। इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह से ही लाभकारी है।

सदाफूली का औषधीय महत्व  Sadaphuli ke aushadhi mahatva


ऐसी है सदाफूली पौधे की आयुर्वेदिक जानकारी।


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