मुरुडशेंग / मरूडफली / Indian screw tree (आवर्तनी) की आयुर्वेदिक जानकारी
• मराठी नाम : मुरुडशेंग
• हिंदी नाम : मरूडफली
• संस्कृत नाम : आवर्तनी
• अंग्रेजी नाम : Indian screw tree
• वनस्पति संरचना :
यह एक झाड़ी वर्गीय वनस्पति है और भारत में सर्वत्र पाई जाती है। नदी और नालों के किनारे यह अधिक मात्रा में मिलती है।
• ऊँचाई :
सामान्यतः यह पौधा 5 से 6 मीटर तक ऊँचा होता है।
• पत्ते :
इस पेड़ के पत्ते धामन के पेड़ जैसे होते हैं, चौड़े और हरे रंग के होते हैं। आकार मध्यम होता है।
• फूल :
इसके फूल पीले रंग के होते हैं, जिनमें हल्की लाल आभा होती है और नीचे की ओर हल्की टोपी जैसी संरचना होती है।
• फल :
इसमें स्क्रू (पेच) जैसे मुड़े हुए फल (फली) लगते हैं। जैसे रस्सी को मरोड़ा गया हो, वैसे इनकी बनावट होती है। इन्हीं में बीज होते हैं, जिनसे पुनरुत्पादन होता है।
• औषधीय उपयोग :
इस पौधे की पत्तियाँ, छाल और फल (फली) औषधि के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
• शेंग (फली) व अन्य भागों में पाए जाने वाले तत्व :
आयरन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फॉस्फोरस, कैल्शियम और सेल्युलोज पाए जाते हैं।
मरूडफली के औषधीय उपयोग :
• छोटे बच्चों को दी जाने वाली घुट्टी में इसका उपयोग किया जाता है।
• पेट में कीड़े, पेट दर्द या पेटशूल होने पर मरूडफली पाउडर एक चम्मच लेने से आराम मिलता है। यह पेट के कीड़ों को मारकर मल के साथ बाहर निकालने में मदद करता है।
• शरीर में गर्मी बढ़ने, कब्ज या बवासीर होने पर मरूडफली पाउडर एक चम्मच सुबह खाली पेट और रात को भोजन के बाद लेने से पेट साफ होता है और बवासीर में आराम मिलता है। गुदा के आसपास इसका लेप लगाने से जलन भी कम होती है।
• कान दर्द में मरूडफली के बीज आधा चम्मच कूटकर 3–4 चम्मच नारियल तेल में उबालकर ठंडा करें और 2–2 बूंद कान में डालें।
या पत्तों का रस निकालकर भी कान में डालने से आराम मिलता है।
• पेट में मरोड़ और बार-बार दस्त होने पर मरूडफली पाउडर चौथाई चम्मच पानी के साथ लेने से लाभ होता है।
• छोटे बच्चों में अधिक कीड़े होने पर लार बढ़ना, चिड़चिड़ापन आदि लक्षण दिखते हैं। ऐसे में एक मरूडफली कूटकर पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पिलाने से कीड़े मल के साथ बाहर निकलते हैं।
• दस्त होने पर 2 ग्राम मरूडफली पाउडर और 2 ग्राम इंद्रजव पाउडर पानी के साथ लेने से दस्त रुकते हैं।
• अपचन और गैस होने पर 2–3 ग्राम मरूडफली पाउडर में थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर लेने से आराम मिलता है।
• शरीर पर घाव, फोड़े या त्वचा रोग होने पर इसके कोमल पत्ते पीसकर बांधने से घाव जल्दी भरते हैं।
• बुखार कम करने के लिए 1 ग्राम मरूडफली और 1 ग्राम कड़ू चिरायता मिलाकर लेने से लाभ होता है।
• दाद, खुजली, गजकर्ण जैसे त्वचा रोगों में पत्तों का लेप लगाया जाता है।
• मधुमेह में भोजन से पहले आधा चम्मच मरूडफली पाउडर लेने से भोजन के बाद शुगर नियंत्रित रहती है। छाल और जड़ का काढ़ा भी उपयोगी है।
• प्रसव के बाद महिलाओं द्वारा मरूडफली पाउडर का सेवन करने से रक्त और कैल्शियम बढ़ाने में मदद मिलती है।
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• सावधानी :
मरूडफली का सेवन सामान्यतः सुरक्षित माना जाता है और इसके विशेष साइड इफेक्ट नहीं होते। फिर भी इसे पहचान कर ही उपयोग करें और आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से लेना अधिक उचित होता है।
👉 इस प्रकार मुरुडशेंग / मरूडफली / Indian screw tree के बारे में आयुर्वेदिक जानकारी।




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