कढ़ीपत्ता / करी पत्ता पौधे की जानकारी
Curry Leaves Tree Information in Hindi
मराठी नाम : कढीपत्ता / कडीपत्ता
हिंदी नाम : कड़ीपत्ता, मीठा नीम
वैज्ञानिक नाम : Murraya koenigii
स्थान / वितरण :
दक्षिण एशिया महाद्वीप में भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन आदि देशों में पाया जाता है।
🌿 रचना (संरचना)
यह एक छोटा झाड़ीदार पौधा है।
इसकी ऊँचाई लगभग 5 से 7 फीट तक होती है।
इसके पत्तों का विशेष रूप से भोजन में उपयोग किया जाता है।
इसकी पत्तियाँ छोटी-छोटी, मेहंदी जैसी होती हैं।
पत्तियों में हल्की कड़वी, सुगंधित खुशबू होती है और स्वाद भी अच्छा होता है।
पत्तियाँ दोनों ओर से पतली तथा बीच में थोड़ी फूली हुई होती हैं और एक डंठल पर लगी होती हैं।
इसमें छोटे, गोल, गुठली जैसे फल लगते हैं।
इन फलों के अंदर मौजूद बीजों से बीज-प्रसार होता है।
🌿 कढ़ीपत्ता के औषधीय उपयोग
यदि सिर में रूसी (डैंड्रफ) हो तो कड़ीपत्ता के पत्तों का चूर्ण बनाकर दही में भिगोकर सिर पर लगाएँ। कुछ समय बाद बाल धो लें। इससे रूसी कम होती है, बाल काले रहते हैं और सफेद बाल कम होने में मदद मिलती है।
कड़ीपत्ता में आयरन (लोह) तत्व पाया जाता है। नियमित आहार में उपयोग करने से शरीर में आयरन बढ़ाने में सहायता मिलती है।
कड़ीपत्ता पाचन शक्ति बढ़ाने का काम करता है।
कड़ीपत्ता में डाइक्लोरोमीथेन और एथिलीन जैसे घटक होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करते हैं। इससे शरीर का खराब (बैड) कोलेस्ट्रॉल कम होता है और अच्छा (गुड) कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है।
कड़ीपत्ता में टैनिन और कार्बाजोल अल्कलॉइड तत्व पाए जाते हैं, जो लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं और लिवर को खराब होने से बचाते हैं।
कड़ीपत्ता में मौजूद हाइपोग्लाइसेमिक तत्व रक्त में शर्करा (ब्लड शुगर) को नियंत्रित रखने में मदद करता है। इसलिए मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों के लिए कड़ीपत्ता लाभकारी है।
एनीमिया (पांडु रोग) में कड़ीपत्ता उपयोगी है, क्योंकि यह शरीर में लोह तत्व बढ़ाता है।
कड़ीपत्ता में लोह, कैल्शियम, वेनेडियम और अन्य खनिज (मिनरल्स) पाए जाते हैं, जो रक्त निर्माण में सहायता करते हैं।
दस्त (जुलाब) होने पर कड़ीपत्ता का सेवन लाभकारी होता है।
हृदय से संबंधित रोगों में कड़ीपत्ता उपयोगी सिद्ध होता है।
कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के कारण हुई शरीर की कमजोरी को दूर करने के लिए कड़ीपत्ता का सेवन लाभदायक है। इससे शरीर को ताकत मिलती है।
कड़ीपत्ता में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जिससे शरीर में कफ जमा नहीं होता। कड़ीपत्ता चूर्ण में एक चम्मच शहद मिलाकर 2–4 दिन सेवन करने से कफ कम होता है और खाँसी में आराम मिलता है।
इसमें लैक्टिक एसिड होने के कारण अपच की समस्या दूर होती है तथा पित्त दोष का निवारण होता है।
कड़ीपत्ता में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर की सूजन कम करते हैं। जोड़ दर्द, जॉइंट पेन और आर्थराइटिस में कड़ीपत्ता लाभकारी है।
जिन व्यक्तियों को थकान, मिचली या उल्टी की समस्या होती है, उनके लिए कड़ीपत्ता का नियमित सेवन फायदेमंद है।
कड़ीपत्ता में विटामिन A पाया जाता है, जो आँखों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है।
🌿 सौंदर्य व अन्य उपयोग
चेहरे पर कड़ीपत्ता का तेल लगाने से मुहाँसे (पिंपल्स) कम होते हैं।
सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट किरणों से त्वचा को होने वाले नुकसान में कड़ीपत्ता का तेल लाभकारी होता है।
कड़ीपत्ता में विटामिन A, B, C और E पाए जाते हैं।
नारियल तेल में कड़ीपत्ता के पत्तों का चूर्ण डालकर उबालें और वह तेल बालों में लगाने से बाल मजबूत होते हैं।
🌿 भोजन में उपयोग
कढ़ीपत्ता के पत्तों का रोज़मर्रा के भोजन में उपयोग किया जाता है।
सब्ज़ी, आमटी, दाल की तड़के में कड़ीपत्ता डाला जाता है।
चटनी बनाते समय भी कड़ीपत्ता मिलाया जाता है।
कड़ीपत्ता से टॉनिक भी बनाया जाता है।
* सावधानी
कड़ीपत्ता के सेवन से सामान्यतः कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।
गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।
इस प्रकार कढ़ीपत्ता पौधे की यह संपूर्ण जानकारी है।




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