अर्जुन वनस्पती | Arjun Plant Information (Hindi)
• संस्कृत नाम:
अर्जुन, धनंजय, अर्जुन सादडा, ककुभ, क्षीरस्वामी, सर्पन, शक्रतारू, देवसाल
• मराठी नाम: अर्जुन, ऐन
• अंग्रेज़ी नाम: The White Murdan Tree
• लैटिन नाम: Terminalia Arjuna
• हिंदी नाम: कोह, नदीसर्ज, ककुभ
• वर्ग: म्याग्नोलियोफाईटा
• कुल: Combretaceae
• वंश: Terminalia
• पाए जाने वाले देश:
भारतीय उपमहाद्वीप। भारत में हिमालय पर्वत, मध्य भारतीय पठार, सह्याद्री पर्वत तथा जहाँ सदाहरित वन पाए जाते हैं, वहाँ अर्जुन वृक्ष मिलता है।
• ऊँचाई:
यह वृक्ष लगभग 60 से 80 फीट तक बढ़ता है।
• पत्ते:
इस वृक्ष के पत्ते साधारण प्रकार के होते हैं। ये लंबवत (अंडाकार) होते हैं और बीच में प्रमुख शिरा होती है।
• तना (खोड़):
इस वृक्ष की छाल बाहर से सफेद और अंदर से गुलाबी रंग की होती है। अंदर का लकड़ी भाग मोटा होता है।
• फूल:
मार्च से जून (वसंत ऋतु) में इस वृक्ष पर फूल आते हैं। ये हल्के पीले रंग के होते हैं।
अर्जुन वनस्पती की संपूर्ण जानकारी। Arjun Plant Information (Hindi)
• फल:
इसके फल खाने की थाली में रखे रवी के अग्र भाग जैसे दिखाई देते हैं और इनमें कई धारियाँ (शिराएँ) होती हैं।
कच्चे फल हरे और पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं।
• छाल:
इस वृक्ष की छाल साल में एक बार झड़ती है। बाहर से सफेद और अंदर से लाल होती है। इसकी छाल का चूर्ण बहुत उपयोगी होता है और आयुर्वेदिक औषधियों में प्रयोग किया जाता है।
• यह वृक्ष स्वाती नक्षत्र का आराध्य वृक्ष माना जाता है।
• इसकी छाल में कैल्शियम, मैग्नीशियम, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं।
• स्वाद: तिक्त, कड़वा और कषाय रसयुक्त होता है।
• अर्जुन वृक्ष के औषधीय उपयोग:
• अर्जुन वृक्ष की छाल अत्यंत उपयोगी औषधि है। इसके चूर्ण में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह स्वाद में कड़वा होता है और हृदय रोग, टीबी, सर्दी, खांसी में लाभकारी है। यह शरीर के कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।
• इसकी छाल का काढ़ा बनाकर पीने से ब्लॉक नसें साफ होती हैं, हृदय मजबूत होता है और हड्डियाँ मजबूत होती हैं।
• चेहरे की झुर्रियाँ कम करने के लिए इसकी छाल का लेप लगाया जाता है। यह स्किन क्रीम में भी उपयोग होता है।
• पेट के अल्सर (आंतरिक घाव) को ठीक करने में सहायक है।
• कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित कर हृदय को मजबूत बनाता है।
• रक्तपित्त की समस्या को कम करने में उपयोगी है।
• अस्थमा में भी इसकी छाल लाभकारी है।
• छाल का चूर्ण शहद के साथ लेना चाहिए।
• हड्डी टूटने पर छाल के चूर्ण में हल्दी, नमक और भीगे चावल मिलाकर लेप बनाने से हड्डी जुड़ने में मदद मिलती है।
• अर्जुन वृक्ष से कुछ होम्योपैथिक दवाइयाँ भी बनाई जाती हैं, जिन्हें अर्जुना टिंचर कहा जाता है।
• इसके फूलों से नेत्रांजन (आँखों की दवा) बनाई जाती है, जो आँखों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
• इसकी छाल से अर्जुनासव और अर्जुनारिष्ट जैसी आयुर्वेदिक औषधियाँ बनाई जाती हैं।
• अर्जुन वृक्ष का गोंद बलवर्धक और पौष्टिक होता है।
• छाल का चूर्ण दूध के साथ लेना लाभदायक होता है।
⚠️ नोट:
ऊपर दी गई औषधीय जानकारी उपयोगी है, लेकिन किसी भी उपचार से पहले योग्य वैद्य या चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।
इस प्रकार
अर्जुन वनस्पती की संपूर्ण जानकारी। Arjun Plant Information (Hindi)




