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शुक्रवार, २७ मार्च, २०२६

वासनवेल / पातालगारुडी / जलजमनी वनस्पति की आयुर्वेदिक औषधीय जानकारी Vasanvel / Patalgarudi / Jaljamani Vanaspati ki Mahiti

 🌿 वासनवेल / पातालगारुडी / जलजमनी वनस्पति की आयुर्वेदिक औषधीय जानकारी
Vasanvel / Patalgarudi / Jaljamani Vanaspati ki Mahiti

वासनवेल / पातालगारुडी / जलजमनी वनस्पति की आयुर्वेदिक औषधीय जानकारी  Vasanvel / Patalgarudi / Jaljamani Vanaspati ki Mahiti


• यह वनस्पति भारत में अलग-अलग नामों से जानी जाती है।

• नाम :

• मराठी नाम : वासनवेल, पातालगारुडी।

• हिंदी नाम : जलजमनी, अंबष्टा, पातालगारुडी।

• अंग्रेज़ी नाम : Velvetleaf / False Pareira।

• संस्कृत नाम : पाठा, पाथा, अंबष्टा।

• वैज्ञानिक नाम : Cissampelos pareira


🌱 • वनस्पति की रचना (Plant Description):

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• तना :

हरे रंग का, मुलायम और लचीला होता है। यह बेल वर्गीय पौधा है और अन्य पेड़ों पर चढ़ता है।

• पत्ते :

दिल के आकार के, गहरे हरे रंग के होते हैं। पीछे की ओर रोयेंदार (रोमांचयुक्त) होते हैं। मुलायम और थोड़ा मखमली होते हैं। इन पर नसें स्पष्ट दिखाई देती हैं।

• फूल :

छोटे, एकलिंगी, पीले रंग के और गुच्छों के रूप में आते हैं।

• फल :

छोटे आकार के, गोलाकार और बैंगनी रंग के होते हैं।

• जड़ :

लंबी, सफेद रंग की होती हैं और जमीन में गहराई तक फैली होती हैं।

👉 इस वनस्पति के पत्ते और जड़ औषधि में उपयोग किए जाते हैं।

⚕️ • औषधीय गुणधर्म :

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• गुण : मधुर, कटु।

• वीर्य : शीत गुण वाली यह वनस्पति है।

• विपाक : कड़वा है।

• पाए जाने वाले देश :

भारत देश में यह वनस्पति सर्वत्र पाई जाती है।

💊 • वासनवेल / पातालगारुडी वनस्पति के औषधीय उपयोग :

• पुरुष व स्त्री रोग :

यदि पुरुषों के वीर्य में शुक्राणु कम हों और स्त्रियों में मासिक धर्म अनियमित हो —

तो 10–15 पत्तों को पीसकर उसका रस निकालें। उसमें 1 चम्मच मिश्री और 1 चम्मच काली मिर्च पाउडर मिलाकर सेवन करें।

👉 इससे मासिक धर्म नियमित होता है तथा पुरुषों के शुक्राणु बढ़ते हैं।

👉 लगातार एक सप्ताह लें। पुरुष अधिक दिनों तक ले सकते हैं।

👉 यह शुक्र स्तंभक होने के कारण यह उपाय प्रभावी होता है।

• पाचन संबंधी रोग :

अपचन, कब्ज, अजीर्ण या अतिसार होने पर —

पत्तों का रस 1 चम्मच मिश्री के साथ रोज लें।

👉 यह दीपन, पाचन और अनुलोमक है तथा पाचन तंत्र को ठीक करता है।

• त्वचा रोग :

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त्वचा पर लाल दाग या खुजली होने पर —

पत्तों को पीसकर उसका रस त्वचा पर लगाना लाभकारी होता है।

• रक्त शुद्धि :

यदि रक्त अशुद्ध हो —

पत्तों का रस 1 चम्मच मिश्री के साथ 10 दिन तक लेने से रक्त शुद्ध होता है।

👉 आमवात रोग में भी इसका उपयोग किया जाता है।

• कफ व श्वसन रोग :

यदि कफ या श्वसन संबंधी रोग हो —

पत्तों का रस मिश्री के साथ लेने से कफ कम होता है और श्वसन रोग में लाभ मिलता है।

• मूत्र रोग :

पेशाब साफ न होना, जलन या दर्द होने पर —

पत्तों का रस मिश्री के साथ लें।

👉 जड़ का काढ़ा भी उपयोगी होता है।

👉 यदि अपचन हो तो —

जड़ का चूर्ण 1 चम्मच + मिश्री 1 चम्मच + अदरक रस 1 चम्मच मिलाकर रोज सेवन करना लाभकारी है।

• विषनाशक :

यह एक उत्तम विषनाशक औषधि है। शरीर से दूषित विष बाहर निकालने में इसकी पत्तियां उपयोगी होती हैं।

• वायरल रोग :

डेंगू तथा अन्य वायरल रोगों में यह वनस्पति उपयोगी मानी जाती है।

👉 इस वनस्पति से  HQCS नामक औषधि बनाई जा रही है।


• यदि आप वासनवेल / पातालगारुडी / जलजमनी इस पौधे से बनी औषधि देखना चाहते हैं और उसे खरीदना चाहते हैं, तो आप नीचे दी गई वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं और खरीद सकते हैं:

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⚠️ • टीप :

वासनवेल / पातालगारुडी / जलजमनी वनस्पति की आयुर्वेदिक औषधीय जानकारी  Vasanvel / Patalgarudi / Jaljamani Vanaspati ki Mahiti

• किसी भी औषधि का सेवन करने से पहले नजदीकी आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।

• निर्धारित मात्रा में ही सेवन करना लाभकारी होता है।

• पौधे की सही पहचान करके ही उपयोग करना चाहिए।

• कम मात्रा में औषधि लेना अधिक सुरक्षित होता है।

👉 इस प्रकार वासनवेल / पातालगारुडी / जलजमनी वनस्पति की आयुर्वेदिक औषधीय जानकारी पूर्ण होती है।

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