🌿 वासनवेल / पातालगारुडी / जलजमनी वनस्पति की आयुर्वेदिक औषधीय जानकारीVasanvel / Patalgarudi / Jaljamani Vanaspati ki Mahiti
• यह वनस्पति भारत में अलग-अलग नामों से जानी जाती है।
• नाम :
• मराठी नाम : वासनवेल, पातालगारुडी।
• हिंदी नाम : जलजमनी, अंबष्टा, पातालगारुडी।
• अंग्रेज़ी नाम : Velvetleaf / False Pareira।
• संस्कृत नाम : पाठा, पाथा, अंबष्टा।
• वैज्ञानिक नाम : Cissampelos pareira
🌱 • वनस्पति की रचना (Plant Description):
• तना :
हरे रंग का, मुलायम और लचीला होता है। यह बेल वर्गीय पौधा है और अन्य पेड़ों पर चढ़ता है।
• पत्ते :
दिल के आकार के, गहरे हरे रंग के होते हैं। पीछे की ओर रोयेंदार (रोमांचयुक्त) होते हैं। मुलायम और थोड़ा मखमली होते हैं। इन पर नसें स्पष्ट दिखाई देती हैं।
• फूल :
छोटे, एकलिंगी, पीले रंग के और गुच्छों के रूप में आते हैं।
• फल :
छोटे आकार के, गोलाकार और बैंगनी रंग के होते हैं।
• जड़ :
लंबी, सफेद रंग की होती हैं और जमीन में गहराई तक फैली होती हैं।
👉 इस वनस्पति के पत्ते और जड़ औषधि में उपयोग किए जाते हैं।
⚕️ • औषधीय गुणधर्म :
• गुण : मधुर, कटु।
• वीर्य : शीत गुण वाली यह वनस्पति है।
• विपाक : कड़वा है।
• पाए जाने वाले देश :
भारत देश में यह वनस्पति सर्वत्र पाई जाती है।
💊 • वासनवेल / पातालगारुडी वनस्पति के औषधीय उपयोग :
• पुरुष व स्त्री रोग :
यदि पुरुषों के वीर्य में शुक्राणु कम हों और स्त्रियों में मासिक धर्म अनियमित हो —
तो 10–15 पत्तों को पीसकर उसका रस निकालें। उसमें 1 चम्मच मिश्री और 1 चम्मच काली मिर्च पाउडर मिलाकर सेवन करें।
👉 इससे मासिक धर्म नियमित होता है तथा पुरुषों के शुक्राणु बढ़ते हैं।
👉 लगातार एक सप्ताह लें। पुरुष अधिक दिनों तक ले सकते हैं।
👉 यह शुक्र स्तंभक होने के कारण यह उपाय प्रभावी होता है।
• पाचन संबंधी रोग :
अपचन, कब्ज, अजीर्ण या अतिसार होने पर —
पत्तों का रस 1 चम्मच मिश्री के साथ रोज लें।
👉 यह दीपन, पाचन और अनुलोमक है तथा पाचन तंत्र को ठीक करता है।
• त्वचा रोग :
त्वचा पर लाल दाग या खुजली होने पर —
पत्तों को पीसकर उसका रस त्वचा पर लगाना लाभकारी होता है।
• रक्त शुद्धि :
यदि रक्त अशुद्ध हो —
पत्तों का रस 1 चम्मच मिश्री के साथ 10 दिन तक लेने से रक्त शुद्ध होता है।
👉 आमवात रोग में भी इसका उपयोग किया जाता है।
• कफ व श्वसन रोग :
यदि कफ या श्वसन संबंधी रोग हो —
पत्तों का रस मिश्री के साथ लेने से कफ कम होता है और श्वसन रोग में लाभ मिलता है।
• मूत्र रोग :
पेशाब साफ न होना, जलन या दर्द होने पर —
पत्तों का रस मिश्री के साथ लें।
👉 जड़ का काढ़ा भी उपयोगी होता है।
👉 यदि अपचन हो तो —
जड़ का चूर्ण 1 चम्मच + मिश्री 1 चम्मच + अदरक रस 1 चम्मच मिलाकर रोज सेवन करना लाभकारी है।
• विषनाशक :
यह एक उत्तम विषनाशक औषधि है। शरीर से दूषित विष बाहर निकालने में इसकी पत्तियां उपयोगी होती हैं।
• वायरल रोग :
डेंगू तथा अन्य वायरल रोगों में यह वनस्पति उपयोगी मानी जाती है।
👉 इस वनस्पति से HQCS नामक औषधि बनाई जा रही है।
• यदि आप वासनवेल / पातालगारुडी / जलजमनी इस पौधे से बनी औषधि देखना चाहते हैं और उसे खरीदना चाहते हैं, तो आप नीचे दी गई वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं और खरीद सकते हैं:
⚠️ • टीप :
• किसी भी औषधि का सेवन करने से पहले नजदीकी आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।
• निर्धारित मात्रा में ही सेवन करना लाभकारी होता है।
• पौधे की सही पहचान करके ही उपयोग करना चाहिए।
• कम मात्रा में औषधि लेना अधिक सुरक्षित होता है।
👉 इस प्रकार वासनवेल / पातालगारुडी / जलजमनी वनस्पति की आयुर्वेदिक औषधीय जानकारी पूर्ण होती है।




