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शनिवार, ४ एप्रिल, २०२६

कंगनी/अतिबला / पेटारी / मुद्रिका वनस्पति Atibala / petari / mudrika vanaspti

 

अतिबला / पेटारी / मुद्रिका वनस्पति के बारे में आयुर्वेदिक जानकारी

कंगनी/अतिबला / पेटारी / मुद्रिका वनस्पति Atibala / petari / mudrika vanaspti


• मराठी नाम : पेटारी, मुद्रिका, करडी, अतिबला

• हिंदी नाम :  कंगनी, अतिबला.

• संस्कृत नाम : अतिबला, कंकतीका

• अंग्रेजी नाम : Indian Mallow / country Mallow

• वैज्ञानिक नाम : Abutilon indicium


वनस्पति परिचय :

 यह एक झाड़ी प्रकार की वनस्पति है। लगभग एक से दो मीटर तक बढ़ती है। भारत में सर्वत्र जंगलों में पाई जाती है।

• तना : 

हरे रंग का, मुलायम और रोएंदार होता है। पुराना होने पर कठोर दिखाई देता है।

• पत्ते : 

फैले हुए हृदय के आकार के होते हैं। मुलायम और रोएंदार होते हैं।

• फूल : 

पीले रंग के, मध्यम आकार के पंखुड़ियों वाले होते हैं। वर्षभर या विशेषकर वर्षा ऋतु में आते हैं।

• फल : 

हरे रंग के फल मोटे दांतेदार और फूले हुए होते हैं। इसके अंदर बीज होते हैं। देखने में चक्र जैसे लगते हैं। पकने पर भूरे रंग के हो जाते हैं।

• जड़ : 

लंबी और मजबूत होती है। औषधि में इसका अधिक उपयोग होता है।

• गुण : 

स्वाद में तीखा, कड़वा, पचने में हल्का, स्निग्ध गुण वाला तथा वात और पित्त को नाश करने वाला है।

कंगनी/अतिबला / पेटारी / मुद्रिका वनस्पति Atibala / petari / mudrika vanaspti


अतिबला / पेटारी / मुद्रिका वनस्पति के औषधीय उपयोग :


• यदि सूखी खांसी हो या उल्टी में खून आता हो, तो फूलों का चूर्ण 1 से 2 ग्राम घी के साथ सेवन करें। लाभ होगा।

• यदि बवासीर हो तो इस वनस्पति की जड़ का चूर्ण शहद के साथ लें। या जड़ का काढ़ा बनाकर 20 से 30 मिली पिएं। लाभकारी होता है।

• सामान्य खांसी हो या बार-बार खांसी आती हो, तो इस वनस्पति के बीजों का चूर्ण और अडूसा पत्तों का काढ़ा मिलाकर 10 से 20 मिली लें। लाभकारी होता है।

• किसी भी प्रकार का मूत्र विकार हो, जैसे पेशाब साफ न होना, जलन आदि, तो इस पौधे की जड़ का काढ़ा 10 से 20 मिली लेने से लाभ होता है। या जड़ को कूटकर एक गिलास पानी में डालकर रातभर भिगो दें। सुबह काढ़ा बनाकर 10 से 20 मिली पिएं।

• यदि पीलिया हो जाए, तो जड़ का चूर्ण 1 से 2 ग्राम शहद के साथ लें। या जड़ का काढ़ा 20 से 30 मिली लें। पीलिया ठीक होता है।

• महिलाओं को मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव हो रहा हो, तो जड़ का चूर्ण 1 से 2 ग्राम शहद के साथ लें। आराम मिलता है।

• पुरुषों में वीर्य संबंधी समस्या होने पर जड़ का काढ़ा, जड़ का चूर्ण या पत्तों का रस लेते रहने से लाभ होता है।

• अतिबला की जड़ और बीज बलवर्धक और शक्तिवर्धक होते हैं। जो शरीर को मजबूत बनाते हैं।

• सर्दी, बुखार, खांसी को कम करते हैं। दर्द निवारक हैं। त्वचा रोगों पर भी प्रभावी औषधि है।

कंगनी/अतिबला / पेटारी / मुद्रिका वनस्पति Atibala / petari / mudrika vanaspti

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टीप

ऊपर बताए अनुसार अतिबला / पेटारी / मुद्रिका इस वनस्पति का औषधीय महत्व है। दी गई मात्रा में लेने से लाभ होता है। लेकिन औषधि को सही पहचान कर ही उपयोग करें। आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से लेना लाभकारी होता है।

• इस प्रकार अतिबला / पेटारी / मुद्रिका वनस्पति के बारे में आयुर्वेदिक जानकारी Atibala / petari / mudrika vanaspti vishyi ayurvedic aushadhi mahiti

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