अंकोल वृक्ष की आयुर्वेदिक जानकारी (Ankol Tree Information in Hindi)
वनस्पति का वैज्ञानिक नाम: Alangium lamarckii
अंग्रेज़ी नाम: Dhera, Thel, Ankol, Sage-leaved Alangium
संस्कृत नाम: अंकोल, दीर्घकील
हिंदी नाम: ढेरा, थेल, अंकुल
मराठी नाम: आंकुल
• स्थान (Habitat) :
अंकोल का पौधा भारत में लगभग सभी जगह पाया जाता है, विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और बिहार में अधिक मात्रा में मिलता है।
पेड के भाग :
• पेड़ की ऊंचाई :
यह एक छोटा वृक्ष होता है जिसकी ऊंचाई लगभग 3 से 6 मीटर तक होती है।
• तना (Stem) :
इसका तना लगभग 2.5 से 3 इंच मोटा होता है।
• शाखाएं (Branches) :
इस पेड़ की शाखाएं टेढ़ी-मेढ़ी (वक्र) होती हैं।
• छाल (Bark) :
अंकोल वृक्ष की छाल धूसर (ग्रे) रंग की और खुरदरी होती है।
• पत्ते (Leaves) :
इसके पत्ते लम्बगोल (ओवल) और नुकीले होते हैं। ये कनेर के पत्तों जैसे दिखते हैं तथा लंबे और चौड़े होते हैं। इस पौधे में पूरे वर्ष नई पत्तियां आती रहती हैं।
• फूल (Flowers) :
अंकोल के फूल सफेद रंग के होते हैं और फरवरी से अप्रैल के बीच खिलते हैं। इनमें हल्की मीठी सुगंध होती है।
• फल (Fruits) :
इसके फल बेरी जैसे होते हैं। शुरुआत में लाल रंग के होते हैं और पकने पर काले हो जाते हैं। अंदर का गूदा सफेद और स्वाद में मीठा होता है।
• जड़ (Root) :
अंकोल की जड़ पीले रंग की, मजबूत और तैलीय होती है।
• बीज (Seeds) :
इसके बीजों से तेल निकाला जाता है।
• अंकोल वृक्ष के आयुर्वेदिक गुण व उपयोग :
अंकोल की जड़ में लगभग 0.8% “अंकोटिन” तत्व पाया जाता है, जिसका कुछ भाग तेल में भी होता है। यह तेल रोगनाशक गुणों से युक्त होता है।
इसका स्वाद कड़वा, कसैला और थोड़ा तीखा होता है तथा इसकी प्रकृति उष्ण, तीक्ष्ण और स्निग्ध होती है।
औषधीय उपयोग :
रक्तचाप (BP) कम करने में इसकी जड़ का उपयोग किया जाता है।
इसका रस विष, कफ, पित्त, वात, दर्द (शूल), कृमि, सूजन और रक्तदोष को कम करने में उपयोगी है।
यह कुत्ते, बिल्ली, चूहे और सांप के विष में लाभकारी माना जाता है।
बीज और जड़ का तेल त्वचा रोगों में उपयोगी होता है (नहाते समय लगाने पर)।
यह तेल वात और कफ को नष्ट करने वाला है।
अतिसार (दस्त) और विषबाधा में इसकी जड़ की छाल को चावल के पानी में घिसकर शहद के साथ लेने से लाभ मिलता है।
पेट में कीड़े होने पर इसका रस उपयोगी होता है।
त्वचा रोग, सूजन, जलोदर, बुखार, मूत्र रुकावट आदि में इसकी जड़ का तेल उपयोगी है।
अगर आपको अंकोल से बनी हुई औषधियां आपके नजदीकी मेडिकल स्टोर में उपलब्ध नहीं हैं और आप उन्हें देखना या खरीदना चाहते हैं, तो आप नीचे दी गई वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं और खरीद सकते हैं।
⚠️ महत्वपूर्ण सलाह :
इन सभी औषधीय उपयोगों के लिए आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह लेना आवश्यक है, ताकि सही मात्रा और विधि का पता चल सके।
• विशेष जानकारी :
अंकोल के 2–3 फल रोज सुबह भोजन के बाद लेने से पुरुषों में वीर्य वृद्धि और यौन शक्ति बढ़ाने में मदद मिलती है (परंतु यह उपयोग भी वैद्य की सलाह से ही करना चाहिए)।
इस प्रकार अंकोल वृक्ष एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधीय वनस्पति है।ankol vruksh ke bare me jankari hindi me





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