🌿 दगडीपाला : एक प्रभावी आयुर्वेदिक औषधीय वनस्पति
आयुर्वेद में अनेक ऐसी औषधीय वनस्पतियाँ बताई गई हैं जो प्राकृतिक रूप से उपलब्ध होकर भी अत्यंत प्रभावशाली होती हैं। दगडीपाला ऐसी ही एक महत्त्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधीय वनस्पति है, जिसका उपयोग जखम, मूत्रखडा, त्वचारोग, फंगल इन्फेक्शन और सूजन जैसी समस्याओं में किया जाता है।
🌱 दगडीपाला वनस्पति का परिचय
मराठी नाम:
दगडीपाला, हरळा, कंबरमोडी, बुगडी, टणटणी, कुटकुटी
हिंदी नाम:
परदेशी, घमरा
संस्कृत नाम:
संधान
वनस्पति प्रकार:
यह एक घासवर्गीय (गवताळ) आयुर्वेदिक औषधीय वनस्पति है।
🍃 दगडीपाला के पत्तों की जानकारी
दगडीपाला के पत्ते हरे रंग के, दांतेदार और कई कोणों वाले होते हैं। पत्तों को छूने पर वे खुरदरे पत्थर जैसे महसूस होते हैं, इसी कारण इसे दगडीपाला कहा जाता है।
🌼 दगडीपाला के फूल
इस वनस्पति के फूल पत्तों के पास की डंठल से निकलते हैं। फूल हल्के सफेद-पीले रंग के होते हैं और बीच में पीला कोश होता है, जो आगे चलकर बीज बनता है।
🌾 बीजों का प्रसार
दगडीपाला के बीज दो तरीकों से फैलते हैं:
हवा के द्वारा
घास खाने वाले पशुओं की विष्ठा के माध्यम से
💊 दगडीपाला के आयुर्वेदिक औषधीय उपयोग
✅ जखम व रक्तस्राव
दगडीपाला एंटीसेप्टिक और एंटीफंगल गुणों से भरपूर है। इसके पत्तों को पीसकर जखम पर लगाने से रक्तस्राव रुकता है और घाव जल्दी भरता है।
✅ मूत्रखडा (पथरी)
सूर्योदय के बाद दगडीपाला के पत्ते तोड़कर उनका रस निकालें। सुबह खाली पेट 5 दिन तक सेवन करने से मूत्रखडा निकलने में मदद मिलती है।
✅ शरीर की गर्मी व मुँह के छाले
जागरण या अधिक गर्मी के कारण मुँह में छाले होने पर दगडीपाला का रस 10–12 दिन लेने से राहत मिलती है।
✅ कमर दर्द, पीठ दर्द व जोड़ों का दर्द
दगडीपाला का रस तेल में पकाकर मालिश करने से दर्द और सूजन में आराम मिलता है।
✅ त्वचारोग व फंगल इन्फेक्शन
दगडीपाला के रस को गोमूत्र में मिलाकर त्वचा पर लगाने से फंगल इन्फेक्शन व अन्य त्वचारोगों में लाभ होता है।
✅ सोरायसिस में उपयोग
विभिन्न औषधीय पत्तों के साथ दगडीपाला को पीसकर 15 दिन भिगोकर लगाने से सोरायसिस में सुधार देखा जाता है।
✅ रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है
दगडीपाला में टैनिन, फ्लेवोनॉइड्स, कैरोटिनॉइड्स जैसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
✅ कैंसर रोधी गुण
आयुर्वेद के अनुसार दगडीपाला कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने में सहायक माना जाता है।
⚠️ सावधानियाँ
कुछ लोगों को एलर्जी हो सकती हैl
गर्भवती महिलाएँ सेवन न करें l
मधुमेह रोगी वैद्य की सलाह लें
किसी भी औषधीय वनस्पति का सेवन डॉक्टर की सलाह से करें
🔚 निष्कर्ष :
दगडीपाला आयुर्वेदिक औषधीय वनस्पति प्राकृतिक उपचार का एक अमूल्य खजाना है। सही तरीके और मार्गदर्शन में इसका उपयोग अनेक रोगों से राहत दिला सकता है।



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