गुरुवार, २७ नोव्हेंबर, २०२५

सिंकोना वनस्पति विषयी आयुर्वेदिक जानकारी Cinchona Vanaspati information in Hindi


सिंकोना वनस्पति विषयी आयुर्वेदिक जानकारी

Cinchona Vanaspati information in Hindi

सिंकोना वनस्पति विषयी आयुर्वेदिक जानकारी  Cinchona Vanaspati information in Hindi


• मराठी नाम : सिंकोना कुनैन

• हिंदी नाम : कुनैन, कैलिसाया

• अंग्रेज़ी नाम : Cinchona

• कुल : रुबिएसी

• वंश : चींचोना

• मूलस्थान : दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के एंडीज पर्वत।

• आशियाई देशों में उपलब्धता : भारत, श्रीलंका, म्यांमार, जावा–सुमात्रा द्वीप, तंजानिया आदि देशों में इसकी खेती की जाती है।

• पत्तियाँ : साधारण पत्तियाँ, समोर–समोर लगती हैं।

• फूल : पाँच भागों में विभाजित, छोटे सफेद या गुलाबी आभा वाले। नीचे की ओर नली जैसी संरचना। फूल गुच्छे के रूप में आते हैं तथा सुगंधित होते हैं।

• इस वृक्ष की छाल निकालकर औषधि में उपयोग की जाती है।

सिंकोना वनस्पति विषयी आयुर्वेदिक जानकारी  Cinchona Vanaspati information in Hindi


सिंकोना की छाल में पाए जाने वाले तत्व :

• क्विनीडीन

• सिन्कोनिन

• सिन्कोनिन (दूसरा प्रकार)

• सिन्केटिन

• हाइड्रोक्विनीन

• म्वीना–मीन

• तथा कुनैन (Quinine) नामक अल्कलॉइड पाया जाता है।

सिंकोना वनस्पति का औषधीय उपयोग :

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Sinkona 


• मलेरिया (हिवताप) में सिंकोना की छाल से बनी दवा उपयोग की जाती है।

• अमांश, पेट की गड़बड़ी, पाचन तंत्र कमजोर होने पर 2 से 5 ग्राम सिंकोना छाल का चूर्ण दूध के साथ लेने से लाभ।

• आँतों की सूजन कम करने में सहायक।

• एनीमिया एवं भूख न लगने पर सिंकोना का चूर्ण लेने से भूख बढ़ती है और स्वास्थ्य सुधारता है।

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• प्रसूति के समय गर्भ-संकुचन होकर डिलीवरी सुगम होने हेतु छाल का चूर्ण या तेल–घटक वाली औषधि दी जाती है।

ध्यान : गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन नहीं करना चाहिए, गर्भपात हो सकता है।

• किसी भी प्रकार के ज्वर (ताप) में सिंकोना चूर्ण लाभकारी।

• नेत्र चिकित्सालयों में नेत्र धवन हेतु सिंकोना से बनी औषधि।

• कीटनाशक बनाने में सिंकोना का उपयोग।

• केस धोने (हेयर वॉश) हेतु भी सिंकोना आधारित द्रव्य उपयोग किए जाते हैं।

• क्विनीन निकालने के बाद बची छाल का उपयोग चमड़ा कमाने में किया जाता है।

• संधिवात (Arthritis) में भी क्विनीन आधारित औषधियाँ उपयोगी।

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औषधि का उपयोग कैसे करें?

• पौधे की छाल निकालकर सुखाएँ, चूर्ण बनाकर चिकित्सक की सलाह से सेवन करें।

सेवन करते समय सावधानी :

• अधिक सेवन से मितली, उलटी आदि हो सकती है।

• गर्भधारण के समय से लेकर डिलीवरी से पहले तक सेवन न करें।

• केवल प्रसूति के समय सेवन लाभदायक।

• हृदय रोगी चिकित्सक की सलाह से ही सेवन करें।

ऐसी है सिंकोना वनस्पति विषयी आयुर्वेदिक जानकारी।

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