🌿 गिलोय वनस्पति की आयुर्वेदिक जानकारी
(Giloy Ayurvedic Medicine Information in Hindi)
गिलोय
नाम : गिलोय, गुळवेल, गरुडवेल
मराठी नाम : गरुडवेल, गूळवेल
संस्कृत नाम : अमृता
प्रकार : वेल (लता)
देश / क्षेत्र : दक्षिण एशिया महाद्वीप में पाई जाती है।
🌱 तना (खोड) :
यह एक वेल (लता) है जो घर के आसपास पाई जाती है। सफेद-हरित रंग की मोटी वेल घर के पास जंगलों में, झाड़ियों व बाड़ पर पाई जाती है।
🍃 पत्ते :
इस वनस्पति के पत्ते हरे रंग के तथा बादाम के आकार के होते हैं।
इन पत्तों में लोहा, कैल्शियम, फॉस्फोरस, जिंक, मैग्नीशियम पाए जाते हैं।
🔴 फल :
इस वेल पर लाल रंग के गोलाकार फल लगते हैं।
🌿 गिलोय वनस्पति की आयुर्वेदिक जानकारी
• गिलोय के रस के सेवन से अनेक लाभ होते हैं।
• गिलोय रस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ाने का कार्य करता है।
• सभी प्रकार के बुखार में गिलोय का रस उपयोगी है। यह डेंगू, मलेरिया, फ्लू, खसरा, टायफॉइड, पीलिया, निमोनिया जैसे रोगों में अत्यंत लाभकारी है।
• गिलोय रक्त में शर्करा (ब्लड शुगर) को नियंत्रित करती है तथा इंसुलिन के निर्माण में सहायक होती है। इसलिए मधुमेह (डायबिटीज) में गिलोय का रस रोज़ सुबह खाली पेट लेना लाभदायक है।
• गिलोय रस इम्युनिटी बढ़ाकर बैक्टीरिया और वायरस से होने वाले संक्रमण से बचाता है।
• जोड़ों के दर्द, घुटनों के दर्द में गिलोय का काढ़ा लगातार 15 दिन लेने से लाभ मिलता है।
• गिलोय रस रक्त को शुद्ध करता है तथा शरीर से विषैले तत्व (टॉक्सिन) बाहर निकालता है। इसलिए त्वचा रोगों में गिलोय का रस लाभदायक है।
• यह रक्तदोष दूर करने के साथ-साथ रक्तवाहिनियों में ब्लॉकेज कम करने और खून के थक्के बनने से रोकने का कार्य करता है।
• भूख न लगने की समस्या में गिलोय रस के साथ जीरा व धनिया चूर्ण लेना लाभकारी है।
• गिलोय उष्ण प्रकृति की होने से जिन लोगों को कब्ज की समस्या हो, उन्हें गिलोय रस के साथ पेट साफ करने वाली औषधि लेनी चाहिए। इसके लिए गिलोय और आंवला रस एक साथ लेना लाभदायक होता है।
• गिलोय रस वात, पित्त और कफ को संतुलित करता है।
• शरीर में अतिरिक्त पानी जमा होने पर गिलोय रस सेवन करने से वह बाहर निकलता है और शरीर स्वस्थ बनता है।
• तनाव कम करने, मानसिक समस्याओं में सुधार करने तथा मस्तिष्क को शांत और संतुलित रखने में गिलोय रस सहायक है।
🥤 गिलोय रस का सेवन कैसे करें?
• गिलोय के पत्ते या वेल के छोटे-छोटे टुकड़े लें।
• उन्हें दो कप पानी में डालकर उबालें और पानी एक कप रहने तक उबालें।
• ठंडा करके सेवन करें।
• स्वस्थ व्यक्ति 15 दिन तक लगातार सेवन करके 10 दिन का अंतर रख सकते हैं, फिर दोबारा सेवन कर सकते हैं।
• कब्ज की समस्या वाले व्यक्ति गिलोय रस लेते समय पेट साफ करने की औषधि अवश्य लें।
• गिलोय के पत्तों का रस निकालकर पानी में उबालकर पीना भी लाभदायक है।
• फोड़े-फुंसियां पकने पर गिलोय के पत्तों को तेल लगाकर गर्म करके बांधने से मवाद निकल जाता है।
• डायबिटीज के रोगियों के लिए गिलोय रस अत्यंत गुणकारी है।
• बुखार कम करने के लिए अमृतारिष्ट नामक आयुर्वेदिक औषधि गिलोय से बनाई जाती है।
• पीलिया रोग में भी गिलोय उपयोगी है।
• वजन कम करने के लिए गिलोय रस और एलोवेरा जूस का सेवन लाभदायक है।
• गिलोय रस के साथ दो चम्मच आंवला रस लेने से पेट संबंधी विकारों में लाभ मिलता है।
🌿 इस प्रकार है
गिलोय (गुळवेल) वनस्पति की संपूर्ण आयुर्वेदिक जानकारी





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