शतावरी का आयुर्वेदिक औषधीय महत्व
मराठी नाम : शतावरी, अश्वेल
हिंदी नाम : सतावर, सतावरी, सरनाई, शतावरी
संस्कृत नाम : शतावरी, शतपदी, शतमूली, नारायणी, पिवरी, अतिरसा, तालमूली, एस्पैरागस कांचनकारिनी, सूक्ष्मपत्रिका, भीरु, ब्रह्मात्रा
अंग्रेजी नाम : Wild Asparagus
वैज्ञानिक नाम : Asparagus racemosus
प्रकार – दो प्रकार होते हैं :
1. विरलकंद शतावरी
2. कुंतपत्रा शतावर
पत्ते :
यह एक छोटी रोपित वर्ग की वनस्पति है, जिसके छोटे आकार के गहरे हरे, नुकीले पत्ते होते हैं।
जड़ :
इसकी जड़ें अनंत-मूल संरचना वाली, बाहर से भूरा रंग और अंदर से सफेद होती हैं। इसी जड़ का आयुर्वेदिक औषधि में मुख्य उपयोग होता है।
फूल :
सफेद रंग के होते हैं।
फल :
कच्चे हरे तथा पकने पर लाल होते हैं।
गुण :
गुरु, शीत, तिक्त, कड़वा, मधुर रस वाली औषधि है l
शतावरी के औषधीय महत्व :
• यह औषधि बच्चों से लेकर वृद्ध, स्त्री व पुरुष सभी के लिए उपयोगी है।
• नींद न आने पर — शतावरी की जड़ का एक चम्मच चूर्ण दूध में उबालकर उसमें घी डालकर पीने से अनिद्रा दूर होती है।
• इसके मधुर-तिक्त गुणों से वात दोष शांत होता है, शरीर का सुखापन व गर्मी कम होती है।
• अम्लपित्त, पेट या सीने में जलन होने पर शतावरी लाभदायक है।
• यह रस, रक्त, मेद, अस्थि, मज्जा, शुक्र धातु को पोषण देकर बुढ़ापा धीमा करती है तथा त्वचा को युवा बनाए रखती है।
• शरीर की थकान, कमजोरी, धावपली, यात्रा, बीमारी के बाद की कमजोरी — इन सबमें क्षीणता मिटाकर शरीर की भरपाई करती है तथा हड्डियों-गुडघों की कमजोरी दूर करती है।
• शतावरी तनाव कम करती है, कोशिकाओं को शक्ति देती है, बुद्धिवर्धक है। मस्तिष्क, मज्जा व धातुओं को पुष्ट करती है।
• यह अग्निपुष्टीकारक है — जठराग्नि बढ़ाकर पाचन सुधारती है। उष्ण औषधि न होते हुए भी यह बच्चों, स्त्रियों, वृद्धों, दुर्बल व्यक्तियों की पाचन शक्ति सुधरती है।
• यह आंखों का स्वास्थ्य भी सुधारती है।
• अतिसार, आंतों की सूजन, रक्तपित्त में बहुत लाभ देती है।
स्त्रियों के लिए विशेष लाभ :
• यह गर्भाशय की मांसपेशियों को बल देती है और स्त्री हार्मोन्स का संतुलन बनाए रखती है, इसलिए इसे स्त्री की सबसे बड़ी सहेली कहा जाता है।
• प्रसूता स्त्री में दूध कम बनता हो तो शतावरी देने से दूध बढ़ता है, माँ-बच्चे दोनों का पोषण होता है।
• स्त्रियों में हड्डियों की कमजोरी, कमर दर्द कम होता है।
• रजोनिवृत्ति (Menopause) में — धड़कन बढ़ना, गर्मी लगना, घबराहट, अनियमित माहवारी, बाल गिरना — इन सबमें शतावरी लाभदायक है।
लगातार 3 महीने सेवन से अच्छा फायदा मिलता है।
• शतावरी वृष्य है, इसलिए स्त्री-पुरुष दोनों में संतान प्राप्ति में आने वाली कठिनाइयों में मदद करती है। गर्भधारण व गर्भ टिकने में सहायक है।
• हृदय की धड़कन नियमित करती है और कोलेस्ट्रॉल कम करती है।
• यह शरीर में यौवन बनाए रखने वाली, त्वचा को चमकदार बनाने वाली चिरतारुण्य देने वाली संजीवनी है।
शतावरी का सेवन कैसे करें :
• शतावरी जड़ का चूर्ण दूध के साथ भोजन से पहले लेना लाभदायक होता है।
• बाजार में शतावरी की गोलियाँ, चूर्ण, रस, कल्प आदि रूप में उपलब्ध है।
• मधुमेह रोगियों को कल्प की बजाय — आधा दूध व आधा पानी मिलाकर उसमें एक चम्मच शतावरी उबालकर एक कप रहने तक घटाकर पीना चाहिए। यह लाभ देता है।
• शतावरी घृत — गाय के घी में शतावरी डालकर बनाया गया घृत — अत्यंत लाभकारी है।
• शतावरी सिद्ध तेल — तेल में शतावरी उबालकर बनाया गया — त्वचा को चमकदार व हड्डियों-स्नायुओं को मजबूत करता है।
• वृद्ध व्यक्तियों में हाथ-पैर में ऐंठन होने पर इस तेल से मालिश करने से लाभ होता है।
• शतावरी सभी के लिए उपयोगी और सुरक्षित मानी गई है।
• कोई भी दवा आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से लें।
ऐसी है शतावरी इस औषधीय वनस्पति की विस्तृत जानकारी।







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